सनातन और हिंदुओं के मुद्दे पर बोले उपराष्ट्रपति

 

सनातन और हिंदुओं के मुद्दे पर बोले उपराष्ट्रपति
सनातन और हिंदुओं के मुद्दे पर बोले उपराष्ट्रपति
जगदीप धनखड़ ने कहा कि यह बर्खास्तगी अक्सर विकृत औपनिवेशिक मानसिकता और हमारी बौद्धिक
विरासत की अक्षम समझ से उत्पन्न होती है। कैसी त्रासदी है! क्या मज़ाक है! वैश्विक अनुशासन वेदांत
दर्शन, हमारे प्राचीन ज्ञान को अपना रहे हैं।उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को इस बात पर
अफसोस जताया कि भारत में सनातन और हिंदू का संदर्भ गुमराह लोगों की ओर से चौंकाने वाली
प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग शब्दों की गहराई और उनके गहरे अर्थ
को समझे बिना इन शब्दों पर प्रतिक्रिया करते हैं, वे खतरनाक पारिस्थितिकी तंत्र से प्रेरित गुमराह
आत्माएं हैं। उन्होंने कहा कि हमारे ही देश में, अध्यात्म की इस भूमि में, कुछ लोग वेदांत और सनातनी
ग्रंथों को प्रतिगामी कहकर खारिज करते हैं। वे ऐसा उन्हें जाने बिना करते हैं, यहाँ तक कि उन्हें
शारीरिक रूप से देखे बिना भी, उनसे गुज़रना तो दूर की बात है।  

सनातन और हिंदुओं के मुद्दे पर बोले उपराष्ट्रपति

जगदीप धनखड़ ने कहा कि यह बर्खास्तगी अक्सर विकृत औपनिवेशिक मानसिकता और हमारी

बौद्धिक विरासत की अक्षम समझ से उत्पन्न होती है। कैसी त्रासदी है! क्या मज़ाक है! वैश्विक

अनुशासन वेदांत दर्शन, हमारे प्राचीन ज्ञान को अपना रहे हैं। वे हमारी सोने की खदान में दोहन

कर रहे हैं। जब हमने कोविड का सामना किया, तो अथर्ववेद का बोलबाला था क्योंकि यह स्वास्थ्य

पर विश्वकोश है। उन्होंने आगे कहा कि विडंबना और पीड़ादायक बात यह है कि इस देश में,

सनातन या हिंदू धर्म का कोई भी संदर्भ अक्सर समझ से परे चौंकाने वाली प्रतिक्रियाएं उत्पन्न

करता है। उनके गहन अर्थ में गहराई से जाने के बजाय, लोग आवेगपूर्ण ढंग से प्रतिक्रिया करते

हैं, जैसे कि बिना सोचे-समझे। क्या अज्ञानता अधिक चरम सीमा तक पहुँच सकती है? क्या उनकी

गलतियों की व्यापकता की भरपाई की जा सकती है? धनखड़ ने कहा कि ये वे आत्माएं हैं जिन्होंने

खुद को गुमराह किया है, एक खतरनाक पारिस्थितिकी तंत्र से प्रेरित होकर जो न केवल इस समाज

को बल्कि खुद को भी खतरे में डालता है। उन्ोहंने कहा कि को एक ढाल बना दिया गया है! कुछ

तत्व संरचित और भयावह तरीके से कार्य करते हैं। उनका डिज़ाइन हानिकारक है। वे अपनी

विनाशकारी विचार प्रक्रियाओं को धर्मनिरपेक्षता के विकृत संस्करण के साथ छुपाते हैं।

ऐसे तत्वों का पर्दाफाश करना, हर भारतीय का कर्तव्य है।

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