सिब्बल ने कहा कि मूल पार्टी से अलग होने की भी स्थिति है
एक नाथ शिंदे गुट की तरफ से हरीश साल्वे ने कहा कि दलबदल विरोधी कानून
उस नेता के लिए नहीं है जो अपनी ही पार्टी के सदस्यों का विश्वास खो चुका है
और वो किसी तरह उन्हें बंद करके सत्ता में रखना चाहता है. ये एंटी पार्टी नहीं इंट्रा पार्टी मामला है.
शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव गुट के अलग हो जाने के बाद शिवसेना किसकी है,
इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है. उद्धव ठाकरे की ओर से
कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की. CJI ने पूछा कि हम जाना चाहते है
कि अगर 2/3 लोग किसी राजनीतिक दल से अलग होते हैं
तो क्या उन्हें नई पार्टी का गठन करना होगा? सीजेआई ने कहा कि
क्या नए ग्रुप को चुनाव आयोग के समक्ष रजिस्टर करना होगा?
या स्पीकर के पास जाना होगा? या उन्हें दूसरी पार्टी में शामिल होना होगा?
सुप्रीम कोर्ट में हुई उद्धव और एकनाथ शिंदे गुट के बीच जबरदस्त बहस
ठाकरे ग्रुप की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर वे नई पार्टी बनाते हैं
तो उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष पंजीकरण कराना होगा, लेकिन किसी अन्य पार्टी में विलय होने पर
पंजीकरण नहीं कराना होगा, लेकिन मुद्दा संतुलन का भी है. 1/3
अभी भी पार्टी में शेष हैं. 2/3 यह नहीं कह सकते कि हम ही पार्टी हैं.
सिब्बल ने कहा कि बागी विधायकों ने न तो उन्होंने अलग पार्टी बनाई न
किसी पार्टी में विलय किया! वो तो खुद को ही मूल पार्टी बता रहे हैं.
संविधान में संशोधन कर दल बदल निरोधक कानून में कई अहम शर्तें जोड़ी गईं,
जिसमें दो तिहाई सदस्य अलग होकर किसी अन्य पार्टी में शामिल हो जाएं
या मूल पार्टी किसी अन्य पार्टी में विलय करें तो असंतुष्ट विधायक या
सांसद अलग गुट बनाएं, तभी वो दल बदल निरोधक कानून के शिकंजे से बाहर रह सकते हैं.
उन्हें केवल एक अलग समूह के रूप में मान्यता दी
सिब्बल ने कहा कि मूल पार्टी से अलग होने की भी स्थिति है. प्रत्येक स्थिति के लिए कानून है
और कानून कहते हैं कि उन्हें केवल एक अलग समूह के रूप में मान्यता दी जाएगी,
लेकिन एक पार्टी के रूप में नहीं, लेकिन उनका दावा है कि वे राजनीतिक दल हैं,
लेकिन यह सच नहीं है. उन्होंने चुनाव आयोग के समक्ष यह बयान दिया है.
सीजेआई ने कहा कि क्या आपके मुताबिक बैठक में शामिल न होना पार्टी
की सदस्यता छोड़ना है. सिब्बल ने कहा कि हां उन्होंने सदस्यता छोड़ दी है.
उन्होंने एक नया व्हिप नियुक्त किया है. उन्होंने एक नया नेता नियुक्त कर लिया है.
सुप्रीम कोर्ट में हुई उद्धव और एकनाथ शिंदे गुट के बीच जबरदस्त बहस
सिब्बल ने कहा कि आप पार्टी से चुनकर आए हैं, आपको उस राजनीतिक पार्टी
की बात माननी चाहिए. बागी गुवाहाटी में बैठक कर कह रहे हैं
कि असली राजनीतिक पार्टी हम हैं.
सिब्बल ने आगे कहा कि आज जो किया जा रहा है वह दसवीं अनुसूची का
उपयोग दलबदल को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है.
अगर इसकी अनुमति दी जाती है, तो इस तरह का इस्तेमाल किसी भी
बहुमत की सरकार को गिराने के लिए किया जा सकता है.
क्या यही है दसवीं अनुसूची का उद्देश्य?
सिब्बल – अगर आप अयोग्य हो जाते हैं तो आप चुनाव आयोग के पास भी नहीं जा सकते.
आप आयोग में आवेदन भी नहीं कर सकते, इसमें चुनाव आयोग कुछ नहीं कर सकता.
सिब्बल – अगर बागी नेता अयोग्य हो जाते हैं, तो सब कुछ अवैध हो जाएगा.
सरकार का गठन, एकनाथ शिंदे का मुख्यमंत्री बनना और
सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले भी अवैध हैं.
सिब्बल के बाद अब सिंघवी ने बहस शुरू की. अभिषेक मनु सिंघवी
ने कहा कि मुद्दा बहुत दिलचस्प है.
उनके सामने एकमात्र बचाव विलय था, जो उन्होंने नहीं किया.
