
हलवा समारोह भावनात्मक मामला
उन्होंने कहा, ‘‘हलवा समारोह भावनात्मक मामला है…आप इसको हल्के में कैसे ले सकते हैं।’’
राहुल गांधी ने सोमवार को बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया था कि 20 अधिकारियों
ने देश का बजट बनाने का काम किया है, लेकिन इनमें से सिर्फ एक अल्पसंख्यक एवं एक ओबीसी
(अन्य पिछड़ा वर्ग) हैं और उनमें एक भी दलित एवं आदिवासी नहीं है। इसके साथ ही राहुल ने
बजट से पहले की हलवा रस्म का जिक्र करते हुए कहा था, ‘‘इस सरकार में दो-तीन प्रतिशत लोग
ही हलवा तैयार कर रहे हैं और उतने ही लोग हलवा खा रहे हैं तथा शेष हिंदुस्तान को यह नहीं मिल
रहा है।’’सीतारमण ने इस आरोप के जवाब में कहा, ‘‘फोटो कार्यक्रम 2013-14 में शुरू हुआ।
हलवा समारोह कर्मचारियों के लिए भावनात्मक मामला
उन्होंने कहा, …यह एक साजिश है… और इसीलिए यह सवाल पूछा जा रहा है। अब इसमें शामिल
सभी लोगों की जाति पूछकर लोगों को विभाजित क्यों किया जा रहा? उन्होंने कहा कि इससे बचना
चाहिए। ऐसे भावनात्मक मुद्दे को हल्के अंदाज में नहीं लेना चाहिए। सीतारमण ने कहा,
‘‘जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी जैसे कांग्रेस नेता एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण
देने के खिलाफ थे और उसी पार्टी के नेता अब पूछ रहे हैं कि वे हलवा समारोह में उपस्थित क्यों
नहीं थे।’’ उन्होंने हलवा समारोह के बाद इससे जुड़े कर्मचारी बजट जारी नहीं होने तक बाहर नहीं
आते हैं। उन्हें पांच रात और चार दिन सबसे दूर रहना होता है।