
हीरो बनने से पहले शत्रुघ्न सिन्हा ने फिल्मों में निभाई खलनायक की भूमिका
साल 1969 में फिल्म ‘साजन’ से शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की।
उनकी डायलॉग डिलीवरी अभिनेता राजकुमार की तरह एकदम मुंहफट रही। यही कारण है
कि शत्रुघ्न सिन्हा को ‘बड़बोला एक्टर’ घोषित कर दिया गया। क्योंकि अभिनेता के मुंह से
निकलने वाले शब्द बंदूक की गोली के समान होते थे। जिसके कारण शत्रुघ्न सिन्हा को
‘शॉटगन’ का टाइटल भी दे दिया गया। शत्रुघ्न ने चार दशक में करीब 200 से अधिक
हिंदी फिल्मों में काम किया है। वहीं फिल्मों में उनके निगेटिव रोल पसंद किए जाने लगे।
इसके अलावा अभिनेता ने एक्टिंग के साथ-साथ ‘दोस्त’, ‘कशमकश’ और ‘दो नारी’
फिल्मों में गाने भी गाए हैं।जब हिंदी सिनेमा में बिहारी बाबू उर्फ शॉटगन उर्फ शत्रुघ्न
सिन्हा की एंट्री हुई, तो उस दौर में मल्टी स्टारर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर तगड़ी कमाई
कर रही थीं। वहीं अपनी कड़क आवाज और चाल-ढाल की मदमस्त शैली की वजह से
शत्रुघ्न जल्दी ही दर्शकों के चहेते बन गए। शत्रुघ्न सिन्ह इंडस्ट्री में हीरो बनने आए थे,
लेकिन इंडस्ट्री ने उनको खलनायक बना दिया। 50-60 के दशक में केएन सिंह, 60-70 के
दशक में प्राण, अमरीश पुरी और अमजद खान विलेन के रूप में छाए थे।अपनी पहली
फिल्म ‘साजन’ के बाद अभिनेत्री मुमजात की सिफारिश पर अभिनेता शत्रुघ्न को
फिल्म ‘खिलौना’ मिली। इस फिल्म के हीरो संजीव कुमार थे और शत्रुघ्न को बिहारी
दल्ला का रोल दिया गया था। अभिनेता शत्रुघ्न ने इस फिल्म में अपने किरदार को
इतनी खूबसूरती से निभाया कि वह रातों-रात निर्माताओं की पहली पसंद बन गए।
शत्रुघ्न सिन्हा ने उस दौर के एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन के साथ कई फिल्में कीं।
साल 1979 में फिल्म ‘काला पत्थर’ आई, जिसमें अमिताभ होरो के रोल में थे। आगे
चलकर शत्रुघ्न और अमिताभ ने फिल्म ‘दोस्ताना’, ‘शान’ और ‘नसीब’ जैसी फिल्मों
में एक साथ नजर आए।