1 घंटा 21 मिनट 46 सेकेंड और 22 पन्नों की कहानी

1 घंटा 21 मिनट 46 सेकेंड और 22 पन्नों की कहानी
1 घंटा 21 मिनट 46 सेकेंड और 22 पन्नों की कहानी
सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा है कि दहेज प्रताड़ना मामले में अदालतों को सावधानी रखनी चाहिए ताकि कानून
के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। जो लोग भी निर्दोष हैं उन्हें बेवजह परेशानियों से बचाया जा सके।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर गौर किया कि पति के परिजनों को फंसाने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। अदालत
ने FIR खारिज करने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की।एक घंटा 21 मिनट और 46 सेकेंड की कहानी
खुद उसी शख्स की जुबानी सामने आई जिसने देश दुनिया को झकझोर कर रख दिया। पहले वो 81
मिनट तक अपनी कहानी सुनाता है और फिर 23 पन्नों में अपनी कहानी लिखता भी है। उसने अपनी
कहानी सुनाई और इसे लिखा भी फिर आखिर में हरेक को अलविदा कह दिया। सुनने वाले को शुक्रिया
कहता है और फिर ये भी कहता है कि आप सब जो फिल्म देख रहे हैं आप सभी का कल्याण हो। फिर
वो मौत को गले लगा लेता है। अतुल सुभाष 34 साल का एक इंजीनियर जिसकी बैंगलुरू के एक कमरे
के अंदर पंखे से झूलती लाश मिली उसके बाद से पूरे देश में इसकी चर्चा है। चर्चा अतुल के नाम की नहीं
हो रही है। बल्कि चर्चा इस बात पर हो रही है कि एक पति की मौत और उसकी मौत के बाद उठता शोर।
जान देने से पहले अतुल सुभाष ने अपनी पत्नी, अपनी सास और जौनपुर फैमिली कोर्ट में तैनात जज
रीता कौशिक पर जान देने के लिए उकसाने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। साल 2021 में अतुल
और उसकी पत्नी निकिता सिंघानिया में मध्यस्थता की एक कोशिश फेल हो गई थी। इस साल निकिता
और उसके परिजनों ने अतुल के परिवार से बिहार के समस्तीपुर में मध्यस्थता की कोशिश की।
 
 

1 घंटा 21 मिनट 46 सेकेंड और 22 पन्नों की कहानी

अतुल ने जाने से पहले अपनी पत्नी के परिवार और न्याय प्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। ये अतुल

की आपबीती थी। 80 मिनट के अपने आखिरी वीडियो में वो कह रहे थे कि अपनी जिंदगी खत्म करना

उनका आखिरी उपाय है। अगर ऐसा हुआ तो निकिता और उसके घरवालों को कुछ नहीं मिल सकेगा।

लेकिन अभी भी ये साफ नहीं है कि निकिता का परिवार क्या सोचता है। बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर

अतुल सुभाष की मौत मामले में दहेज उत्पीड़न/घरेलू हिंसा के मौजूदा कानून में समुचित संशोधन

की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है।

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