
साल 1998 से पहले एनडीए बना। इस गठबंधन में 13 पार्टियां शामिल थीं। वहीं 2004 के
चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए अस्तित्व में
आया। यूपीए के दलों को 222 सीटें थी, इसके बावजूद वामपंथी दलों और सपा का बाहर से
उसे समर्थन प्राप्त था। ये भारतीय राजनीति के गठबंधन का दौर था। कमोबेश यही स्थिति
2009 के चुनाव में भी देखने को मिली। लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर पर सवार
बीजेपी की पतवार अपने बल पर 272 के जादुई आंकड़े को पार करने में कामयाब हो गई।
2019 में तो उसने अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए 300 के निशान को भी क्रॉस
कर दिया। लेकिन 2024 के चुनाव में एनडीए के 300 के आंकड़े के आसपास मंडराने से
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल तय लग रहा है।
2024 के चुनावी बैटल को 10 प्वाइंट में समझें
भाजपा अपने बूते पर 370 सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही थी और एनडीए
को 400 से अधिक सीटों का लक्ष्य दिया था। उत्तर प्रदेश में बीजेपी को
काफी नुकसान उठाना पड़ा है,जहां से लोकसभा की 80 सीटें आती हैं।
शाम 5 बजे के आसपास, बीजेपी 241 सीटों पर आगे है, एनडीए 296
सीटों पर आगे है। इंडिया ब्लॉक 228 सीटों पर आगे है, कांग्रेस
100 सीटों पर आगे है। बीजेपी के पावर गेम को उत्तर प्रदेश ने बिगाड़
कर रख दिया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के दो लड़कों की जोड़ी
ने यूपी की आधी सीटों पर अपनी बढ़त को मजबूत किया। बीजेपी का
आंकड़ा पिछले बार की अपेक्षा करीब-करीब आधा का रह गया।बीजेपी
गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में साल 2014 में 73 सीटें हासिल की थी।
2019 में भी सीटें पिछले बार के मुकाबले कुछ कम तो हुई
लेकिन स्थिति नियंत्रण में ही रही। इस बार भी अधिकांश
एग्जिट पोल ने पार्टी को बढ़त मिलने की भविष्यवाणी की थी।
चुनावी बैटल के अन्य दो राज्य भी बीजेपी के लिए मुफीद नहीं रहे।
पार्टी की बड़ी उम्मीद बंगाल में 2019 से भी खराब प्रदर्शन होता
नजर आया। 2019 के चुनाव में 18 सीटें जीतने वाली बीजेपी सिर्फ
11 सीटों पर बीजेपी लीड लेती देखी गई। । ऐसा प्रतीत होता है कि
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने अपनी खोई हुई ज़मीन
वापस पा ली है और 31 सीटों पर आगे है। महाराष्ट्र ने शिवसेना
और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक पैंतरेबाजी के प्रति अपनी
अस्वीकृति स्पष्ट कर दी है। उद्धव ठाकरे गुट 11 सीटों पर आगे है और
शिंदे सेना 5 सीटों पर आगे है। एनसीपी का अजीत पवार गुट सिर्फ
एक सीट पर आगे है और उनके चाचा शरद पवार 7 सीटों पर आगे
हैं।