
3.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
योगी ने आगे लिखा कि प्रथम अमृत स्नान पर्व के सकुशल संपन्न होने पर सनातन धर्म के आधार
सभी पूज्य अखाड़ों, महाकुम्भ मेला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, पुलिस प्रशासन, स्वच्छताकर्मियों,
स्वयंसेवी संगठनों एवं धार्मिक संस्थाओं, नाविकों तथा महाकुम्भ से जुड़े केंद्र व प्रदेश सरकार के सभी
विभागों को हृदय से साधुवाद तथा प्रदेश वासियों को बधाई! पुण्य फलें, महाकुम्भ चलें। एक और
पोस्ट में उन्होंने लिखा कि तीर्थराज प्रयाग में आज महाकुम्भ के प्रथम ‘अमृत स्नान’ और मकर
संक्रांति के पावन अवसर पर सभी अखाड़ों और घाटों पर पुष्पवर्षा सनातन संस्कृति का वंदन, श्रद्धा
का अभिनंदन और आस्था को नमन है।मृत स्नान के अगले क्रम में तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी
अखाड़ा और आनंद अखाड़ा के साधु संतों ने अमृत स्नान किया जिसमें सबसे आगे अखाड़ा परिषद के
अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी थे और उनके बाद अखाड़ा के झंडे और फिर आराध्य देवता कार्तिकेय स्वामी
और सूर्य नारायण पालकी पर सवार थे। इनके पीछे नागा सन्यासियों की टोली थी और इन सभी के
बीच निरंजनी के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि एक भव्य रथ पर सवार थे।निरंजनी अखाड़े
की साध्वी और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा, “घाट पर युवाओं की भीड़ यह बताती
है कि युवाओं में सनातन धर्म के प्रति कितनी आस्था है। जब भी किसी ने सनातन धर्म को चुनौती दी,
युवा और संत समाज ने आगे आकर धर्म की रक्षा की।” निरंजनी और आनंद अखाड़े के बाद जूना
अखाड़े, आवाहन अखाड़े और पंचअग्नि अखाड़े के हजारों साधु संतों ने अमृत स्नान किया। जूना के
साथ ही किन्नर अखाड़े के संतों ने भी गंगा में डुबकी लगाई।