
4 साल से अधिक समय से हिरासत में बंद UAPA के आरोपी को जमानत दी
कोर्ट मुकेश सलाम नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर विचार कर रहा था, जिस पर गैरकानूनी
गतिविधि रोकथाम अधिनियम, 1967 की धारा 10, 13, 17, 38(1)(2), 40, 22-ए और 22-सी के
तहत अपराध का आरोप लगाया गया है; छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा अधिनियम, 2005 की
धारा 8(2)(3)(5) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 201 और 149/34 के तहत मामला
दर्ज किया गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा जमानत देने से इनकार करने के बाद उन्होंने
सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि मुकेश सलाम नक्सली
कमांडर राजू सलाम का मामा था तथा राजू सलाम के साथ सीधे तथा निरंतर संपर्क में था तथा
उसे सामग्री उपलब्ध कराता था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा उद्धृत 100
गवाहों में से अब तक केवल 40 गवाहों की ही जांच की गई है।न्यायालय ने कहा, “उपर्युक्त
परिस्थितियों और कथित मामले की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, हमारा विचार है कि
याचिकाकर्ता को लगातार हिरासत में रखने से न्याय का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। मुकदमे
के जल्द समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है। याचिकाकर्ता 6 मई 2020 से हिरासत में
है। हम तदनुसार आदेश देते हैं और निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा
किया जाए, जो कि विशेष न्यायाधीश (एनआईए अधिनियम), कांकेर द्वारा एफआईआर
संख्या 9/2020 के संबंध में लगाए जा सकने वाले नियमों और शर्तों के अधीन हो।”