
देश में पूरी तरीके से चुनाव प्रचार का आगाज हो गया है। वार-पलटवार की राजनीति
तेज हो गई है। ऐसे में हमने चाय पर समीक्षा कार्यक्रम में भी इन्हीं मुद्दों पर चर्चा की
है। रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर नीरज कुमार दुबे ने कहा कि
भले ही इसमें देर हुई लेकिन विपक्ष अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले आज शराब के मामले
में जेल में है। विपक्ष के सभी नेता जिनके ऊपर कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार के दाग हैं,
वे अब एक नेता को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह संदेश भी
जनता के बीच जा रहा है।
हमने नीरज दुबे से यह भी पूछा
हमने नीरज दुबे से यह भी पूछा कि क्या भाजपा के साथ आने वाले नेताओं का
केस बंद कर दिया जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार यह बात
कहती रही है कि किसी भी नेता का केस बंद नहीं किया जा रहा है। उनके ऊपर
भी कार्यवाही लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि अगर केजरीवाल की गिरफ्तारी
सही नहीं है तो फिर उन्हें अदालत ने जमानत क्यों नहीं दी? संजय सिंह और
मनीष सिसोदिया जो की कई महीनो से जेल में बंद है, अगर वह बेकसूर है
तो फिर अदालत उन्हें जमानत क्यों नहीं दे रही है? उन्होंने कहा कि विपक्ष
के हक में फैसला आता है तो न्यायपालिका पर विपक्ष कोई सवाल नहीं
उठाता है, लेकिन जैसे ही उसके मन मुताबिक फैसला नहीं आता है,
तो वह सवाल उठने शुरू कर देता है।
कांग्रेस की स्थिति पर बात करते हुए नीरज कुमार दुबे ने कहा कि आज कांग्रेस
की स्थिति कमजोर होते दिखाई दे रही है। कांग्रेस में जो नेता शामिल हो रहे हैं,
उन्हें भी टिकट की गारंटी नहीं मिल रही है क्योंकि कांग्रेस पार्टी गठबंधन के
तहत वह सीट अपने पास रख पाएगी या नहीं, इसकी गारंटी नहीं है। नीरज
कुमार दुबे ने कहा कि कांग्रेस के जो वार्ताकार है, उनका जमीनी कनेक्शन नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नंबर बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव
लड़ने की कोशिश कर रही है। कई जगहों पर कांग्रेस का जनाधार नहीं है,
बावजूद इसके वह प्रत्याशी उतारने को तैयार है।
Chai Par Sameeksha: चुनाव प्रचार ने पकड़ा जोर
नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस के सहयोगी कांग्रेस पार्टी को आंख
दिखा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की हैसियत लगातार कमजोर होती जा रही है,
इसलिए उनकी पार्टी के नेता दूसरी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा
कि सत्ता में जो भी पार्टी नहीं होती, उसमें भगदड़ मचती है, खासकर के चुनाव
के समय। युवा नेताओं को कांग्रेस में अपना भविष्य नहीं दिख रहा। इसलिए
वे पार्टी में आना नहीं चाहते। जो चुनावी माहौल है उसको भांपते हुए भी
कई नेता भाजपा से विरोध नहीं कर पा रहे हैं जबकि कांग्रेस के अंदर विरोध
साफ तौर पर देखने को मिल जाता है।भाजपा को लेकर भी हमने नीरज दुबे
से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि संकल्प पत्र को लेकर भाजपा ने जो अपने
नाम जारी किए हैं, वह वैसे नाम है जो पूरी तरीके से जमीन से जुड़े हुए हैं।
बीजेपी ने संकल्प पत्र के लिए अलग-अलग अभियान चलाए हैं, बीजेपी
के पास कई तरह के सलाह है जो पार्टी अपने संकल्प पत्र में शामिल करना
चाहती है। उन्होंने कहा कि जमीन हकीकत यही है कि भाजपा का पलड़ा
भारी दिखाई दे रहा है। विपक्ष सिर्फ मीडिया में दिखाई दे रहा है। जमीन
पर भाजपा के कार्यकर्ता लोगों को अपनी ओर साधने की कोशिश
में जुटे हुए हैं।