Haryana में कृषि ऋण पर ब्याज और जुर्माना माफ करने का ऐलान

आर्थिकमुआवजे को दोगुना कर एक करोड़ रुपये करने का भी फैसला
हम आपको बता दें कि हरियाणा सरकार ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सैनिकों के परिवारों के लिए आर्थिक
मुआवजे को दोगुना कर एक करोड़ रुपये करने का भी फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में
श्री रामलला जी की प्राण प्रतिष्ठा का वर्ष, 2024 ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि इसलिए 2024 के ऐतिहासिक
वर्ष में इस सरकार का लगातार 5वां बजट पेश करना मेरे लिए सौभाग्य और सम्मान की बात है।
उन्होंने कहा कि ₹1 लाख 89 हज़ार 876 करोड़ का यह बजट हरियाणा की अर्थव्यवस्था को बल देगा।
मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि यह बजट हरियाणा एक हरियाणवी एक की भावना को और मजबूत करेगा।
हम आपको बता दें कि खट्टर राज्य के वित्त मंत्री भी हैं।
2024-25 के लिए 1,89,876.61 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित
उन्होंने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा, ”मैं 2024-25 के लिए 1,89,876.61 करोड़ रुपये का बजट
प्रस्तावित करता हूं जो 2023-24 के 1,70,490.84
करोड़ रुपये (संशोधित अनुमान) से 11.37 प्रतिशत अधिक है।’’ उन्होंने एक बड़ी घोषणा में कहा कि किसानों
द्वारा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) से लिए गए फसल ऋण पर ब्याज और जुर्माना माफ किया
जाएगा। उन्होंने कहा, ”मैं फसल ऋण पर ब्याज तथा जुर्माना माफ करने की घोषणा करता हूं।
यदि फसल ऋण 30 सितंबर 2023 तक लिया गया हो और मूल राशि का भुगतान 31 मई 2024 तक कर दिया
गया तो साथ ही किसान एमएफएमबी (मेरी फसल मेरा ब्योरा) के साथ पंजीकृत हो।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे ऋण
एमएफएमबी मंच पर पंजीकृत किसानों द्वारा लिया जाना चाहिए। उसके बाद किसान खरीफ सीजन में पीएसीएस
से फसल ऋण के लिए पात्र होंगे।
मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने उनसे पूछा, ”आप किसानों की बात करते हैं,
फिर आप किसानों पर एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) क्यों लगाते हैं। किसान हरियाणा की सीमाओं पर विरोध
प्रदर्शन कर रहे हैं।’’ इसके जवाब में खट्टर ने कहा, ” जितने किसान आपके प्यारे हैं, उतने ही हमे भी हैं।’’
उन्होंने कहा, ”मैं किसान का बेटा हूं, मैं किसानों का दर्द समझता हूं। जब मैंने किसानों के हित में एक योजना की
घोषणा की है, तो या तो आप इसे पचा नहीं पा रहे हैं या पसंद नहीं कर रहे हैं।’’ इस बीच, हरियाणा पुलिस ने
शुक्रवार को किसान आंदोलन का हिस्सा रहे कुछ किसान नेताओं के खिलाफ एनएसए के प्रावधानों को
लागू करने के अपने फैसले को वापस लेने की शुक्रवार को जानकारी दी।