
उधर, मुसलमानों को होली के दिन घर में ही रहने के उनके सुझाव पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो
गया है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता शरवेंद्र बिक्रम सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री की नजरों में बने रहने
के लिए अधिकारी उनकी बातों की नकल कर रहे हैं। ऐसे बयान देने वालों और खुलेआम पक्षपात
करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यह निंदनीय है और अधिकारियों को भाजपा के
एजेंट की तरह काम नहीं करना चाहिए।” वहीं कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई की मीडिया कमेटी के
उपाध्यक्ष मनीष हिंदवी ने पुलिस अधिकारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कोई भी
अधिकारी, चाहे वह कोई भी हो, उसे धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए; तभी इस देश में शासन ठीक
से चल सकता है। अन्यथा, इससे अराजकता फैल जाएगी।” उन्होंने कहा, “अगर किसी धर्म
विशेष के लोगों ने रंग खेलने पर असहजता जताई है, तो अधिकारी का कर्तव्य है कि वह
सुनिश्चित करे कि भय या असुरक्षा का माहौल न बने। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि होली
भी मनाई जाए और नमाज भी शांतिपूर्वक अदा की जाए। यह कहना कि होली साल में एक
बार आती है, जबकि जुमे की नमाज 52 बार होती है और जो लोग रंगों से नफरत करते हैं,
उन्हें घर के अंदर रहना चाहिए, यह एक राजनीतिक बयान है।” हिंदवी ने कहा, “वोट बैंक
की राजनीति करने वाले लोग इस तरह की टिप्पणी करते हैं। एक अधिकारी के तौर पर
कोई इस तरह की टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि कल को वे कह सकते हैं कि वे सिर्फ
हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, मुसलमानों की नहीं।” उन्होंने कहा, “इस पुलिस
अधिकारी द्वारा दिया गया बयान बेहद निंदनीय है।