
Kasba Peth सीट से भाजपा ने Hemant Rasane को दिया टिकट
कसबा सीट पर 1995 से 2019 तक बीजेपी का एकछत्र दबदबा रहा। सर्वदलीय और सर्वजाति-धर्म नेता के
रूप में गिरीश बापट की छवि को हमेशा मतदाताओं का समर्थन प्राप्त रहा। वहीं, कसबा सीट पर बीजेपी ने
लगातार पांच बार जीत हासिल की। 2019 में बीजेपी ने गिरीश बापट को पुणे लोकसभा के लिए उम्मीदवार
बनाया और वह बड़े वोटों के अंतर से संसद के लिए चुने गए थे। गिरीश बापट की जगह बीजेपी ने पुणे की
पूर्व मेयर मुक्ता तिलक को उम्मीदवार बनाया और वह जीत गईं, लेकिन कैंसर के कारण उनकी असामयिक
मौत हो गई। तिलक के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के रवींद्र धांगेकर ने बीजेपी के हेमंत
रसाने को हराकर बीजेपी के गढ़ में कांग्रेस को जीत दिलाई।कसबा पेठ में कांग्रेस की जीत पर पूरे राज्य में
तीखी बहस छिड़ी थी। जिस सीट पर 25 साल तक बीजेपी का कब्जा रहा, कांग्रेस ने उसी गढ़ को ढहाकर
इतिहास रच दिया। कस्बे के मतदाताओं का वोट सामान्य राज्य का वोट माना जाता है। इसका कारण
यह है कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में मिश्रित आबादी होती है और इसमें विभिन्न जातियों और धर्मों के लोगों
के मन की झलक मिलती है। फिलहाल कसबा का प्रतिनिधित्व वर्तमान में
कांग्रेस के रवींद्र धांगेकर कर रहे हैं।