
भूस्खलन, अचानक बाढ़ और अस्थिर हिमनदों (ग्लेशियरों) के खतरे के कारण
मार्गों के असुरक्षित होने पर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और किन्नौर जिला प्रशासन
ने अगले आदेश तक श्रीखंड महादेव यात्रा और किन्नौर कैलाश यात्रा पर रोक
लगा दी है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। कुल्लू जिले में 16,900
फुट की ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव भारत की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं
में से एक मानी जाती है।इस यात्रा में श्रद्धालुओं को एक तरफ की 35 किलोमीटर
की पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो घास के मैदानों से होकर 72 फुट ऊंचे
शिवलिंग तक पहुंचती है। वहीं किन्नौर जिले में 19,850 फुट की ऊंचाई पर
स्थित किन्नौर कैलाश को भगवान शिव का शीतकालीन निवास माना जाता है।
दोनों यात्राएं सामान्यतः जुलाई महीने में शुरू होती हैं। श्रीखंड महादेव यात्रा को
उस समय स्थगित कर दिया गया जब अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं
संबद्ध खेल संस्थान, मनाली के विशेषज्ञों तथा राजस्व और वन विभाग के
अधिकारियों की संयुक्त टीम ने पारंपरिक और वैकल्पिक दोनों मार्गों को
असुरक्षित घोषित कर दिया।
Landslide और ग्लेशियर पिघलने से श्रीखंड किन्नौर कैलाश यात्रा पर रोक
निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, भीमद्वारी-पार्वती बाग मार्ग तथा प्रस्तावित वैकल्पिक
रास्ते में तीव्र ढलान, अस्थिर भू-भाग, फिसलन भरे रास्ते और कई पर्वतीय नाले हैं।
इन मार्गों पर भूस्खलन, चट्टानों के गिरने और अचानक बाढ़ आने का खतरा
अत्यधिक बना हुआ है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में किसी भी
आपात स्थिति में बचाव अभियान चलाना अत्यंत कठिन होगा। कुल्लू प्रशासन ने
यात्रा पर लगी रोक का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और उल्लंघन
करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।इसी तरह किन्नौर जिला
प्रशासन ने भी किन्नौर कैलाश यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है।
स्काउटिंग टीम की रिपोर्ट में मिलिंग खाटा से शिवलिंग के बीच बड़े-बड़े ग्लेशियर,
गुफा और सोरंग के बीच अस्थिर चट्टानें तथा हाल में हुईं चट्टान खिसकने की
घटनाओं का उल्लेख किया गया है जिससे मार्ग बेहद खतरनाक हो गया है।
अधिकारियों ने बताया कि बढ़ते तापमान के कारण बर्फ पिघलने से भूस्खलन
और चट्टानों के गिरने का खतरा और अधिक बढ़ गया है।