
Maha Kumbh की असल तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल चीजें
हम आपको बता दें कि संगम में पुण्य की डुबकी के बाद संतों के सान्निध्य में किए गए
सत्संग का असर तो स्थाई होगा। रामचरितमानस में तुलसीदास ने भी कई जगहों पर
सत्संग की महिमा और महत्ता का वर्णन किया है। एक जगह वह कहते हैं, “बिनु सत्संग
विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई”। सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए
एक अन्य जगह पर वह कहते हैं, “सतसंगत मुद मंगल मूला। सोई फल सिधि सब
साधन फूला”। आगे वह इसकी महत्ता बताते हुए कहते हैं, सत्संग से व्यक्ति में
विवेक आता है। यह विवेक मोह और भ्रम को दूर करता है। इनके दूर होने से भगवान
के प्रति अनुराग बढ़ जाता है। (होइ बिबेकु मोह भ्रम भागा। तब रघुनाथ चरन अनुरागा)
। इस लिहाज से महाकुंभ व्यक्ति में विवेक जगाने का महापर्व भी है। खास बात ये है
कि अमृतपान का ये सुअवसर सबके लिए और समान रूप से है। आप जितना चाहें,
जब तक चाहें इसका लाभ उठा सकते हैं।देखा जाये तो एक संन्यासी योगी आदित्यनाथ,
जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हैं, ने जनकेंद्रित राजधर्म से चीजों को और व्यवस्थित
एवं सुंदर बनाने का हर संभव प्रयास किया है। उसी का नतीजा है कि देर रात अगर
ऊपर से महाकुंभ नगर को देखें तो लगता है, मां गंगा के सफेद रेती के कैनवास पर
किसी ने रंग-बिरंगे टेंट और जगमग रौशनी, नावों और गंगा-जमुना के अविरल
जल का बतौर पेंट प्रयोग कर बेहद खूबसूरती से एक बेहद उम्दा पेंटिंग उकेर दी हो।
बहरहाल, महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ की घटना को लेकर क्या
आपका मन भी चिंतित हो गया है?