
Maharashtra के पुणे में संदिग्ध बीमारी से मचा हाहाकार
जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में सामने आया कि
101 मरीजों में से 19 मरीज नौ वर्ष से कम उम्र के है। 15 मरीज 10-19 वर्ष, 20
मरीज 20-29 वर्ष, 13 मरीज 30-39 वर्ष, 12 मरीज 40-49 वर्ष, 13 मरीज
50-59 वर्ष, आठ मरीज 60-69 वर्ष और एक मरीज 70-80 वर्ष की आयु के
है। वहीं इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए स्थानीय विभाग पुणे के कई
इलाकों से पानी के सैंपल इकट्ठा कर रहा है और इन्हें टेस्ट के लिए भेज रहा है।
इन सैंपल को आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में भेजा
गया है, जहां इनकी जांच में डेंगू, जीका और चिकनगुनिया के लिए नकारात्मक
रिजल्ट आए है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जीबीएस की स्थिति में शरीर की
प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला होता है। ये कमजोरी, सुन्नता और पक्षाघात के
कारण होती है। हाथ, पैर में कमजोरी और झुनझुनी इसके शुरुआती लक्षण होते
है। इस बीमारी के होने के सटीक कारण सामने नहीं आए है।इस बीमारी को
लेकर स्वास्थ्य विभाग भी सलाह जारी कर चुका है। इसके अनुसार सहायक
चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है जो प्राइवेट अस्पतालों की स्थिति
पर नजर रखेंगे। मरीजों और उनके परिजनों की जरुरतों को देखते हुए उनकी
सहायता करेंगे।इसी बीच डिप्टी सीएम अजित पवार ने गिलियन-बैरे सिंड्रोम
के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऐलान किया है कि इस संक्रमण से पीड़ितों का
इलाज मुफ्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से पीड़ितों का मुफ्त
इलाज होगा। मरीजों को दवाएं मुहैया कराने का फैसला सरकार कर चुकी है।