
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया. अदालत ने सीबीआई से जुड़े इस मामले में
सुनवाई के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया. अब इस मसले पर अगली सुनवाई
22 जुलाई को होगी.
Manish Sisodia को फिर कोर्ट से नहीं मिली राहत
आरोप है कि शराब व्यापारियों को लाइसेंस देने के लिए 2021-22 के लिए दिल्ली
सरकार की आबकारी नीति ने कार्टेलाइजेशन की अनुमति दी और कुछ डीलरों को
फायदा पहुंचाया, जिन्होंने कथित तौर पर इसके लिए रिश्वत दी थी, इस आरोप
का AAP ने बार-बार खंडन किया। बाद में नीति को खत्म कर दिया गया
और दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच
की सिफारिश की, जिसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम
(पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया।
इससे पहले आप नेता ने निचली अदालत के 30 अप्रैल 2024 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. शीर्ष अदालत ने भी साल 2021-22 में निर्मित दिल्ली आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन मामले को लेकर दायर उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
26 फरवरी 2023 को हुई थी गिरफ्तारी
दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई ने पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया से घंटों तक पूछताछ के बाद 26 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया था. उसके बाद से मनीष सिसोदिया को अभी तक जमानत नहीं मिली है. सीबीआई की गिरफ्तारी के बाद मार्च, 2023 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था.
हाल ही में सीबीआई की टीम ने तिहाड़ जेल पहुंचकर उनसे पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था. सीबीआई का आरोप है कि भ्रष्टाचार के इस मामले में मनीष सिसोदिया ने अहम भूमिका निभाई थी. वर्तमान में दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े दोनों ही मामले में उनके खिलाफ अलग-अलग अदालतों जमानत याचिका लंबित हैं.
दिल्ली के डिप्टी सीएम की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है. मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी तानाशाही की इंतेहा है. देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा मंत्री को गिरफ्तार कर बीजेपी ने अच्छा नहीं किया.