
UN में भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर क्या चाहती है दुनिया
एस जयशंकर ने इस सवाल के जवाब में कहा कि पांच देशों को यूएनएससी में
बहुत ही स्पेशल जगह दी गई है। मैं कहूंगा कि ज्यादा से ज्यादा देश ये भी
मानते हैं कि उस बदलाव में भारत को भी शामिल होना चाहिए। मेरा मतलब है
मैं हमारी स्वीकार्यता को बढ़ता हुआ देख सकता हूं। जयशंकर ने कहा कि मैं
आपको बता सकता हूं कि 15 साल पहले कभी इस तरह की स्वीकार्यता नहीं
थी। यह बदल गया है लेकिन अभी भी हम वहां नहीं हैं। आज विश्व में दो संघर्ष
चल रहे हैं, दो बहुत गंभीर संघर्ष, उन पर संयुक्त राष्ट्र कहां है, वह केवल मूकदर्शक
बना हुआ है।एस जयशंकर ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1945 में स्थापित
इस विश्व निकाय में शुरुआत में 50 देश थे, जो इन वर्षों में बढ़कर लगभग चार
गुना हो गए हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक तरह से वैसी पुरानी कंपनी की
तरह है, जो पूरी तरह से बाजार के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है, लेकिन
जगह (जरूर) घेर रही है। जब यह समय से पीछे होती है, तो इस दुनिया में आपके
पास स्टार्ट-अप और नवाचार होते हैं, इसलिए अलग-अलग लोग अपनी तरह से
चीजें करना शुरू कर देते हैं। आज आपके पास एक संयुक्त राष्ट्र है, लेकिन इसकी
कार्यप्रणाली अपर्याप्त है, इसके बावजूद यह अब भी एकमात्र सर्वमान्य बहुपक्षीय मंच है।