
Yasin Malik को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कार्यवाही में शामिल होने का निर्देश
यासीन मलिक वर्तमान में 1990 में चार भारतीय वायु सेना कर्मियों की हत्या और 1989 में
जम्मू-कश्मीर के पूर्व गृह मंत्री की बेटी रुबैया सईद के अपहरण में कथित संलिप्तता के लिए
जम्मू-कश्मीर की टाडा (आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां) अदालत में मुकदमे
का सामना कर रहा है। रुबैया के अपहरण के पांच दिन बाद मुक्त कर दिया गया था जब केंद्र
में तत्कालीन भाजपा समर्थित वीपी सिंह सरकार ने बदले में पांच आतंकवादियों को रिहा
कर दिया था, अब तमिलनाडु में रहती है। वह सीबीआई के लिए अभियोजन पक्ष की गवाह
हैं, जिसने 1990 के दशक की शुरुआत में मामले को संभाला था। विशेष एनआईए अदालत
द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद मलिक को तिहाड़ जेल में रखा गया है। टाडा अदालत ने
सुनवाई के दौरान मलिक की व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए समन जारी किया था। हालाँकि,
सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि मलिक की जम्मू-कश्मीर की यात्रा
से क्षेत्र में माहौल खराब हो सकता है और विशेष रूप से मामले से जुड़े गवाहों की सुरक्षा को
खतरा पैदा हो सकता है। सुनवाई स्थगित करने और मलिक को वीसी के माध्यम से शामिल
होने की अनुमति देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुरक्षा चिंताओं और निष्पक्ष सुनवाई की
आवश्यकता दोनों को संबोधित करने के प्रयास के रूप में देखा जाता है।