उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आखिरी उम्मीद

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आखिरी उम्मीद
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आखिरी उम्मीद

 लखनऊ। पिछला लोकसभा चुनाव हार चुके कांग्रेस नेता राहुल गांधी दो

दशक बाद फिर गांधी परिवार का इतिहास दोहराते हुए अमेठी छोड़कर

रायबरेली की सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2004 में सोनिया

गांधी ने उनके लिए अमेठी की सीट छोड़कर रायबरेली से चुनाव लड़ा था।

राहुल की चुनावी यात्रा अमेठी से शुरू हुई थी। बीस वर्षों बाद मां सोनिया

गांधी के रायबरेली छोड़ने पर वह इस सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं।इस

लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व उनके दादा फिरोज गांधी और दादी इंदिरा

गांधी ने किया था। अमेठी की तुलना में रायबरेली सीट कांग्रेस के लिए उप्र

में सबसे ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। इस सीट पर अभी तक हुए 20

लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने 17 बार जीत दर्ज की है। उत्तर प्रदेश में सपा

के साथ गठबंधन करके कांग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 15 सीटों पर

पहले ही प्रत्याशियों की घोषणा की जा चुकी थी।केवल रायबरेली और अमेठी

से प्रत्याशियों की घोषणा का इंतजार था। उम्मीद की जा रही थी कि रायबरेली

से प्रियंका गांधी को पहला चुनाव लड़ाया जाएगा और राहुल अमेठी से ही उतरेंगे।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आखिरी उम्मीद

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए यह लोकसभा चुनाव आखिरी उम्मीद बन गया है।

1984 के लोस चुनाव में उप्र में 85 में 83 सीटें जीतकर सबसे शानदार प्रदर्शन

करने वाली कांग्रेस 40 वर्षों के अंदर 2019 के चुनाव में रायबरेली की एक सीट पर

सिमट कर रह गई थी। 1984 के चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के पीछे पूर्व प्रधानमंत्री

इंदिरा गांधी की हत्या बड़ी वजह बनी थी। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आखिरी उम्मीदकेवल

रायबरेली और अमेठी से प्रत्याशियों की घोषणा का इंतजार था। उम्मीद की जा रही थी

कि रायबरेली से प्रियंका गांधी को पहला चुनाव लड़ाया जाएगा और राहुल अमेठी से ही

उतरेंगे। अमेठी की तुलना में रायबरेली सीट कांग्रेस के लिए उप्र में सबसे ज्यादा सुरक्षित

मानी जाती है। 

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