माकपा के दिग्गज सोमनाथ चटर्जी 1977 से 1980 और 1980 से 1984 तक, लगातार
दो बार जादवपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद थे। मगर, वह वहां से अपनी जीत की हैट्ट्रिक
नहीं लगा पाए। युवा ममता बनर्जी ने उन्हें हरा दिया। यह पहली बार था कि, ममता
बनर्जी भारत की संसद पहुंचीं वह भी जादवपुर से ही। तब, ममता के हारे सोमनाथ
चटर्जी जादवपुर लोकसभा सीट छोड़ने को मजबूर हो गए। वह बोलपुर लोकसभा क्षेत्र
चले गए जहां से वह 1985 से 2009 तक, लगातार सात बार सांसद निर्वाचित हुए।
इसके साथ ही 2004 से 2009 तक कांग्रेस नीत यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार
में वह लोकसभा के अध्यक्ष भी रहे।
लगातार छह बार रहीं सांसद
ममता बनर्जी की बात करें तो, वह भी अपने राजनीतिक करियर में पहली बार जो
जादवपुर से आम चुनाव लड़ीं तो वही यहां उनका आखिरी चुनाव भी रहा। उसके बाद
1991-96, 1996-98, 1998-99, 1999-2004, 2004-09 और 2009-2011 तक,
लगातार छह बार कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र से वह सांसद निर्वाचित होती रहीं।
मगर, 2009 से 2014 की लोकसभा के कार्यकाल के बीच में 2011 में सांसद पद से
इस्तीफा देकर वह दिल्ली से वापस कोलकाता लौट आईं। क्योंकि, 2011 में उनकी
पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इतिहास रच दिया। वर्ष 1977 से 2011 तक, लगातार 34 वर्षों
तक काबिज माकपा नीत वाममोर्चा को पश्चिम बंगाल की सत्ता से बेदखल कर दिया
व खुद काबिज हो गई और अब तक काबिज ही है।
उस सीट की सियासत जहां से वाममोर्चा को पटखनी देकर उभरीं ममता बनर्जी
इतिहास के झरोखे से देखें तो उपरोक्त 1984 के बाद 1993 और 1998 ममता बनर्जी के
राजनीतिक करियर का अहम पड़ाव था। 21 जुलाई 1993 को पश्चिम बंगाल प्रदेश युवा
कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने अपने नेतृत्व में ‘राइटर्स चलो अभियान’ अंजाम दिया
था। उस वक्त पश्चिम बंगाल की माकपा नीत वाममोर्चा सरकार के सचिवालय राइटर्स
बिल्डिंग जाने का यह अभियान, सचित्र मतदाता पहचान पत्र बनाए जाने की मांग को
लेकर ही अंजाम दिया गया था। कांग्रेस का आरोप था कि, मतदाता पहचान पत्र सचित्र
नहीं रहने के चलते राज्य के सत्तारूढ़ माकपा नीत वाममोर्चा की ओर से चुनाव में खूब
धांधली की जाती है। सो, ‘राइटर्स चलो अभियान’ अंजाम दिया गया। मगर, उस अभियान
पर पुलिसिया फायरिंग हो गई जिसमें 13 लोग मारे गए। सैकड़ों लोग घायल हुए। यहां तक
कि ममता बनर्जी को भी पुलिस की बेरहमी का शिकार होना पड़ा। उनके बाल पकड़ कर
उन्हें घसीटा गया। कहा जाता है कि, उसी समय ममता बनर्जी ने यह शपथ ली कि वह
अब तब तक अपने बाल खुले रखेंगी और उसे नहीं बांधेंगी जब तक कि वह माकपा नीत
वाममोर्चा को राज्य की सत्ता से बेदखल नहीं कर देती हैं और उन्होंने ऐसा करके दिखा
भी दिया।