
देखा जाये तो भारतीय सेना का इतिहास शौर्य और बलिदान से भरा है।
कारगिल युद्ध से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक तक
हमारे सैनिकों ने यह साबित किया है
कि वे हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।
भारत का सुरक्षा परिदृश्य लगातार जटिल होता जा रहा है।
एक ओर चीन अपनी विस्तारवादी नीतियों के साथ सीमा पर दबाव बनाए हुए है
तो दूसरी ओर पाकिस्तान छद्म युद्ध और आतंकवाद के ज़रिए भारत को अस्थिर करने
की कोशिश करता रहता है।
ऐसे समय में भारतीय सेना का ‘भैरव कमांडो’ बल का गठन करना एक निर्णायक कदम है।
खास बात यह है कि इसी साल 31 अक्टूबर तक भैरव बटालियन चीन
और पाकिस्तानी सीमा पर तैनात भी हो जायेंगी। हम आपको बता दें
कि ये नई इकाइयाँ आकार में छोटी लेकिन युद्धक क्षमता में कहीं अधिक घातक होंगी।
गति, लचीलापन और सटीक प्रहार इनकी पहचान होगी।
अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन और हाई-टेक गैजेट्स से लैस ‘भैरव’ कमांडो पल
भर में दुश्मन को चौंकाकर उसकी रणनीति ध्वस्त कर देंगे।
गति लचीलापन और घातक प्रहार, यही है ‘Bhairav’ Commandos की पहचान, 31 अक्टूबर तक China और Pakistan
इससे न केवल सेना की सामरिक शक्ति बढ़ेगी बल्कि स्पेशल फ़ोर्सेस को भी
अपने गुप्त अभियानों पर पूरी तरह केंद्रित रहने का अवसर मिलेगा।
देखा जाये तो भारतीय सेना का इतिहास शौर्य और बलिदान से भरा है।
कारगिल युद्ध से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक तक
हमारे सैनिकों ने यह साबित किया है कि वे हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।
कठिन पहाड़ों, बर्फ़ीली चोटियों, रेगिस्तानों और घने जंगलों
में भारतीय सैनिकों का पराक्रम दुश्मनों के लिए हमेशा चुनौती रहा है।
ऐसे में ‘भैरव’ कमांडो का गठन इस गौरवशाली परंपरा
में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ देगा। यह कदम स्पष्ट संदेश देता है
कि भारत केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि प्रहारक क्षमता को भी बराबर महत्व देता है।
सीमा पर बढ़ते खतरों के बीच यह नई शक्ति दुश्मनों के लिए
भय और देशवासियों के लिए गर्व का कारण बनेगी।