घोङो की मुर्तियो की कहानी

चारो पैर नीचे किये घोड़े की पीठ पर बैठे हुये कई स्टेचू देखे

घोङो की मुर्तियो की कहानी

एक पाँव ऊपर किये, कभी दोनो पैर ऊपर किये हुए,

तो कभी चारो पैर नीचे किये घोड़े की पीठ पर बैठे हुये कई स्टेचू देखे ।

मेरी ये जिज्ञासा थी कि आखिर घोड़े के दोनों पाँव ऊपर क्यो है ।

बहुत खोजने के बाद ये तथ्य सामने आए

घोङो की मुर्तियो की कहानी

1-घोड़े के दोनों आगे के पैर हवा मे हो तो सम्मानित व्यक्ति युद्ध मे बलिदान हुआ है

2-घोड़े का आगे का एक पैर हवा में हो तो युद्ध में प्राप्त जख्म के कारण सम्मानित व्यक्ति की मृत्यु हुई है

3-घोड़े के चारो पैर जमीन पर हो तो प्राकृतिक कारण से व्यक्ति की मृत्यु हुई है

4-घोड़े का बाया पैर उठा होने पर.. किसी भी घोड़े पर सवार महापुरुष के घोड़े पर बाया पैर उठा हो

युद्ध में उसके राजा से पहले घोड़ा शहीद हुआ था

तो समझ लेना चाहिए कि युद्ध में उसके राजा से पहले घोड़ा शहीद हुआ था…

जैसे की महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय और प्रसिद्ध नीलवर्ण घोडा चेतक का बाया पैर सदैव स्टेच्यू में उठा होता है।

आपने अक्सर देखा होगा कि चौराहों पर बने योद्धाओं के स्टेच्यू में

उनके घोड़ें के दोनों पांव कभी ऊपर, तो कभी नीचे या कभी एक टांग ऊपर होती है.

लेकिन क्या आप स्टेच्यू को ऐसा बनाए जाने के पीछे की वजह जानते हैं.

घोङो की मुर्तियो की कहानी

यहां तक कि शहर के कई अहम चौराहों पर उनके स्टेचू लगे हुए भी देखे होंगे.

जहां वे अपने घोड़े पर सवार अपना हथियार लिए हुए होते हैं.

अगर आपने कभी इन योद्धाओं के स्टेच्यू को गौर से देखा होगा,

तो आपने शायद एक बात गौर की होगी कि कुछ योद्धाओं के घोड़े के सामने वाले

दोनों पैर ऊपर हवा में होते हैं, तो कुछ योद्धाओं के घोड़े का सामने

वाला केवल एक पैर हवा में होता है. जबकि

कुछ योद्धाओं के घोड़े के सामने वाले दोनों पैर नीचे जमीन पर लगे होते हैं.

आर्मी कमांडो
लिलाधर लमोरिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »