नीतीश कुमार पर लगाया मुस्लिमों के पीठ में छुरा घोंपने का आरोप

 नीतीश कुमार पर लगाया मुस्लिमों के पीठ में छुरा घोंपने का आरोप
नीतीश कुमार पर लगाया मुस्लिमों के पीठ में छुरा घोंपने का आरोप
किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार ने मुसलमानों की पीठ में छुरा घोंपकर उनके लिए
बहुत कुछ किया है। उन्होंने 2015 में मुसलमानों के भारी समर्थन से सरकार बनाई
और दो साल बाद भाजपा के साथ फिर से गठबंधन कर लिया।रामगढ़ (बिहार)।
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश
कुमार पर हमला करते हुए उन्हें ‘निर्लज्ज’ करार दिया तथा आरोप लगाया कि
कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन कर मुस्लिमों की ‘पीठ में
छुरा घोंपा’ है।पूर्व राजनीतिक विश्लेषक और एक समय कुमार के करीबी रहे किशोर
ने यह टिप्पणी चार विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के
लिए जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सुप्रीमो द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय से संपर्क
किये जाने के सवाल पर की। किशोर ने कहा, ‘हां, नीतीश कुमार ने मुसलमानों
की पीठ में छुरा घोंपकर उनके लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने 2015 में मुसलमानों
के भारी समर्थन से सरकार बनाई और दो साल बाद भाजपा के साथ फिर से
गठबंधन कर लिया।’

 नीतीश कुमार पर लगाया मुस्लिमों के पीठ में छुरा घोंपने का आरोप

कुमार ने किशोर को जदयू का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था लेकिन संशोधित नागरिकता

अधिनियम (सीएए) पर मतभेद सार्वजनिक होने पर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया

गया था। किशोर ने बिहार के मुख्यमंत्री पर ‘ऐसे कानून का समर्थन करने का आरोप

लगाया था, जो मुसलमानों को मताधिकार से वंचित करने का खतरा पैदा करता है।

‘जन सुराज संस्थापक ने कहा, ‘मुसलमानों ने नीतीश कुमार का फिर से समर्थन किया

जब वे दो साल पहले महागठबंधन में वापस आए, लेकिन बाद में वे भाजपा के नेतृत्व

वाले राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन)में वापस चले गए। अब उनकी पार्टी केंद्र

सरकार में भागीदार है। उसके नेता केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री हैं जिसने विवादास्पद

वक्फ विधेयक को मंजूरी दी है।’ उन्होंने दावा किया, ‘नीतीश कुमार एक निर्लज्ज

व्यक्ति हैं जिनसे बिहार की जनता नाराज है और उन्हें सत्ता से बाहर करना चाहती

है।’उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाले बयान के

बारे में पूछे जाने पर किशोर ने कहा, ‘हिंदुओं को असुरक्षित महसूस कराना और

उसका चुनावी लाभ उठाना भाजपा की पुरानी रणनीति है।

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