लोकसभा चुनाव के लिए अब लड़ाई तेज हो चली है। सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस
ली है और अपनी-अपनी रणनीति पर काम करने में जुट गए हैं। मध्य प्रदेश में भी दोनों
प्रमुख दल, भाजपा और कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
दोनों पार्टियों ने बूथ स्तर तक पहुंचने की रणनीति बनाई है। इसके अलावा दोनों दलों ने
क्षेत्रों के हिसाब से भी अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस ने
कमलनाथ को महाकौशल, विवेक तन्खा को बुंदेलखंड, अरूण यादव को मालवा-निमाड़,
अजय सिंह को विंध्य और गोविंद सिंह को ग्वालियर चंबल क्षेत्र की जिम्मेदारी दी है।
वहीं दिग्विजय सिंह और कांतिलाल भूरिया जैसे वरिष्ठ नेता, जो खुद चुनाव लड़ रहे हैं,
वह फिलहाल अपनी सीटों पर ही फोकस कर रहे हैं।
कांग्रेस के सामने वजूद बचाने की चुनौती
जहां भाजपा पिछली बार प्रदेश की 28 सीटें जीतने के बाद इस बार सभी 29 सीटों पर जीत
का लक्ष्य लेकर चल रही है, तो कांग्रेस के सामने संकट है कि वह अपना वजूद बचाए रखे।
हालिया विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके
बाद पार्टी उन क्षेत्रों में ज्यादा फोकस कर रही है, जहां पर उसने विधानसभा चुनाव में अच्छा
प्रदर्शन किया था। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की महाकौशल क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है, इसलिए उन्हें इस क्षेत्र की सीटों पर फोकस करने के लिए कहा गया है। वह छिंदवाड़ा सीट पर काफी सक्रिय हैं और दो बार क्षेत्र की सभी विधानसभाओं का दौरा कर चुके हैं। इसके अलावा बैतूल, बालाघाट और जबलपुर में भी बड़ी संख्या में उनके समर्थक मौजूद हैं।
मध्यप्रदेश में भाजपा-कांग्रेस ने कसी कमर
इसी तरह कांग्रेस ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का विंध्य में प्रभाव देखते हुए उन्हें क्षेत्र की रीवा, सीधी, सतना समेत आसपास की सीटों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है। वहीं, अरुण यादव को मालवा-निमाड़ के क्षेत्र में सक्रिय रहने को कहा गया है। पार्टी ने मालवा क्षेत्र की आदिवासी सीटों की जिम्मेदारी उमंग सिंघार को सौंपी है। विवेक तन्खा को सागर संभाग संभालने और गोविंद सिंह को ग्वालियर-चंबल क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा कांग्रेस ने प्रदेश की सभी 29 सीटों के लिए प्रभारी भी नियुक्त किए हैं। भाजपा ने क्षेत्रीय प्रभारियों के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी संसदीय सीट विदिशा और अलग-अलग सीटों पर प्रत्याशियों के समर्थन में सभाएं करने की जिम्मेदारी दी है।
