लाउडस्पीकर धर्म का हिस्सा नहीं
20 जनवरी से 25 जनवरी 2025 तक क्या कुछ हुआ? कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट और टिप्पणियों
का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं। कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले
भारत के विभिन्न न्यायालयों की मुख्य खबरों के बारे में बताएंगे।कोलकाता रेप-मर्डर केस के दोषी
संजय रॉय को फांसी की सजा की मांग को लेकर हाई कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार। मथुरा के शाही
ईदगाह मस्जिद परिसर का कोर्ट निगरानी में सर्वेक्षण पर रोक बढ़ी।
ताहिर हुसैन की अर्जी पर SC
के जजों का अलग-अलग फैसला। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट का
बड़ा फैसला। इस सप्ताह यानी 20 जनवरी से 25 जनवरी 2025 तक क्या कुछ हुआ? कोर्ट के
कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट और टिप्पणियों का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं।
कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले भारत के विभिन्न न्यायालयों की मुख्य
खबरों के बारे में बताएंगे।बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किसी भी
धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। कानूनी एजेसियों को ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन
करने वालों के खिलाफ तुरंत ऐक्शन का भी निर्देश दिया। जस्टिस एएस गडकरी और एससी
चांडक की बेंच ने ये टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि शोर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। कोई यह
– दावा नहीं कर सकता है कि उसे लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाती
है तो उसके अधिकार किसी भी तरह प्रभावित होते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार प्रार्थना
स्थलों के लाउडस्पीकर, वॉइस एम्प्लिफायर के शोर पर काबू के लिए गंभीरता से विचार करे।
लाउडस्पीकर धर्म का हिस्सा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक को बढ़ा दिया, जिसमें उसने मथुरा
स्थित शाही ईदगाह मस्जिद का सर्वेक्षण कोर्ट कमिश्नर से कराने की अनुमति दी थी। चीफ जस्टिस
संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने मस्जिद समिति की
अपीलों पर विचार किया, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। ये याचिकाएं
उन आदेशों के खिलाफ दायर व की गई है, जिनमें हाई कोर्ट ने मथुरा की अदालतों से संबंधित
मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित कर लिया था और दिसंबर 2023 के आदेश में मस्जिद
परिसर का निरीक्षण करने के लिए कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति की अनुमति दी थी।दिल्ली
पुलिस को कड़ी फटकार मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन
की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई की, जिसने कथित तौर पर 2020 में शहर में दंगों
के दौरान हिंसा की योजना बनाई और भड़काई और कई आरोपों का सामना किया। हुसैन अब
असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ हैं। उन्होंने
अगले महीने होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए खुद के लिए प्रचार करने के लिए
अस्थायी रिहाई की मांग की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उसे ठुकराए जाने के बाद
दायर की गई याचिका, दो न्यायाधीशों की पीठ – न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और
न्यायमूर्ति पंकज मिथल द्वारा खंडित फैसले के बाद खारिज कर दी गई। जस्टिस
अमानुल्लाह इसके पक्ष में थे, लेकिन जस्टिस मिथल नहीं थे। अब इस मामले की
सुनवाई एक बड़ी पीठ द्वारा किये जाने की उम्मीद है।