
टेरर फंडिंग के मामले में बड़ी कामयाबी
मैनेजर ने दावा किया कि ये दोनों कश्मीर से हैं। परवेज़ ने हमें बताया था कि वह घूमने के लिए
दिल्ली आये थे। 12 फरवरी की रात करीब 11 बजे परवेज आया। उसका दोस्त फ़ारूक
अभी भी हमारे कमरे में रहता है। हमें नहीं पता कि वह 12वीं से 26वीं तारीख तक कहां
गए।’ हमें नहीं पता कि वह कहां जाता था और क्या करता था।हमारे गेस्ट हाउस
में भी कोई उनसे मिलने नहीं आया। अगर कोई आता है तो उसके लिए
हमारे पास विजिटर एंट्री है। एक कारोबारी दोस्त मोहम्मद फ़ारूक़ ने कहा
कि मैं परवेज़ को 5-6 साल से जानता
हूँ, मेरा उससे
आर्थिक लेन-देन है। हमारा शॉल का कारोबार है। उन्होंने बताया कि जब पुलिस आई तो
मुझे और परवेज़ को
थाने ले गई, हम दोनों से पूछताछ की गई, पूछताछ के बाद कश्मीर पुलिस उसे ले गई
और मुझे छोड़ दिया।
मुझे कभी नहीं लगा कि वह किसी आतंकवादी गतिविधि में शामिल था। उन्होंने कहा
कि पुलिस को अन्य
जानकारी पता करनी चाहिए। परवेज़ कश्मीर से शॉल लाते थे और दिल्ली में बेचते थे।
मुझे नहीं पता कि
इस यात्रा के दौरान वह कहां गए और किससे मिले।