बढ़ती प्याज़ की क़ीमतों में क्यों आया भारत का नाम :पाकिस्तान

बढ़ती प्याज़ की क़ीमतों में क्यों आया भारत का नाम

प्याज़ की क़ीमत कुछ हफ़्तों में बढ़ी

पाकिस्तान में पिछले कुछ हफ़्तों में प्याज़ की क़ीमत काफ़ी बढ़ी है.

दाम बढ़ने से एक आम पाकिस्तानी के लिए महंगाई की

उच्च दर के ज़माने में प्याज़ ख़रीदना भी मुश्किल हो गया है.

प्याज़ का दाम बढ़ने की वजह स्थानीय तौर पर इसकी सप्लाई में कोई रुकावट नहीं है

क्योंकि प्याज़ के व्यापार से जुड़े लोगों के अनुसार खेत से मंडी में इसकी सप्लाई सामान्य है.

बढ़ती प्याज़ की क़ीमतों में क्यों आया भारत का नाम

उनके अनुसार देश में प्याज़ का दाम बढ़ने का कारण पड़ोसी देश

भारत की ओर से प्याज़ के निर्यात पर लगाई गई पाबंदी है.

यह पाबंदी भारतीय बाजार में प्याज़ की दर को क़ाबू में रखने के लिए लगाई गई है.

भारत से प्याज़ के निर्यात पर पाबंदी ने पाकिस्तान में प्याज़ के दाम पर असर डाला है

और उसकी क़ीमत स्थानीय बाज़ार में पिछले एक माह के दौरान डेढ़ सौ रुपए

(लगभग 45 भारतीय रुपए) प्रति किलो से बढ़कर

कुछ शहरों में 270 रुपए ( क़रीब 80 भारतीय रुपए) प्रति किलो तक हो चुकी है.

पाकिस्तान के लोगों पर महंगाई की मार

भारत की ओर से प्याज़ के निर्यात पर पाबंदी का मक़सद

अपने स्थानीय बाज़ार में प्याज़ के दाम को बढ़ने से रोकना था

ताकि स्थानीय उपभोक्ताओं को कम क़ीमत पर प्याज़ मिल सके.

दुनिया के विभिन्न देशों से प्याज़ के बड़े ऑर्डर्स मिले हैं.

वो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़बरें जो दिनभर सुर्खियां बनीं.

हालांकि पाकिस्तान भारत से प्याज़ आयात नहीं करता

लेकिन इस पाबंदी ने पाकिस्तान में भी प्याज़ की क़ीमत पर असर डाला है.

ऑल पाकिस्तान फ़्रूट्स एंड वेजिटेबल एक्सपोर्टर्स, इंपोर्टर्स एंड मर्चेंट्स एसोसिएशन के

मुख्य संरक्षक अब्दुल वहीद अहमद ने इस बारे में कहा कि भारत से प्याज़ के

निर्यात पर पाबंदी के कारण पाकिस्तानी एक्सपोर्टर्स को

उन्होंने कहा कि क्योंकि विदेशी मंडियों में प्याज़ की ज़रूरत है

बढ़ती प्याज़ की क़ीमतों में क्यों आया भारत का नाम

तो भारत से प्याज़ की सप्लाई बंद होने के बाद उन्होंने पाकिस्तान का रुख़ किया और यहां से माल लेना शुरू किया.

इसके बाद पाकिस्तान में प्याज़ की क़ीमतों में भी इज़ाफ़ा देखा गया. फल और

सब्ज़ी निर्यातक व व्यापारी शाहजहां ने बीबीसी को बताया कि जब भारत की ओर से पाबंदी लगाई गई थी

तो उस समय स्थानीय थोक बाज़ार में एक मन प्याज़ की क़ीमत छह हज़ार से

साढ़े छह हज़ार रुपये के बीच थी

भारत से सप्लाई बंद होने के बाद विदेशी मंडियों में प्याज़ की ज़रूरत

जो पिछले एक महीने में बढ़कर नौ हज़ार रुपये प्रति मन से भी ऊपर चली गई है.

और इसकी बुनियाद पर महंगाई की दर तय की जाती है.

सांख्यिकी संस्था की ओर से प्याज़ के दाम के आंकड़े बताते हैं कि

जब भारत की ओर से प्याज़ के निर्यात पर पाबंदी लगाई गई थी तो

उस समय पाकिस्तान में एक किलो प्याज़ का

दाम औसतन डेढ़ सौ रुपए के लगभग था.

पाकिस्तान में सांख्यिकी संस्था की ओर से खाद्य पदार्थों की साप्ताहिक क़ीमतें इकट्ठा की जाती हैं

यह दाम पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में विभिन्न दामों का औसत है.

लेकिन एक महीने के बाद देश में प्याज़ की औसत क़ीमत 220 रुपए तक चली गई

जबकि देश के कुछ हिस्सों में इसकी क़ीमत 270 रुपए प्रति किलो या उससे भी ऊपर है.

कराची फल और सब्ज़ी मंडी में एसोसिएशन के अध्यक्ष ज़ाहिद आवान ने बताया कि

इस समय बलूचिस्तान की फ़सल ख़त्म हो चुकी है और सिंध से सप्लाई हो रही है.

उनके अनुसार अगर पाकिस्तान से प्याज़ इसी तरह निर्यात होता रहा तो डर है कि इसका दाम और बढ़ेगा.

डर है कि प्याज़ दाम का और बढ़ेगा अगर पाकिस्तान से इसी तरह निर्यात होता रहा

प्रभारी केंद्र सरकार की ओर से प्याज़ के निर्यात के लिए इसका दाम बढ़ा दिया गया है.

केंद्र सरकार की ओर से प्याज़ के निर्यात मूल्य को बारह सौ डॉलर प्रति टन रखा गया है

यानी इस क़ीमत से कम पर प्याज़ विदेश नहीं भेजा जा सकता है.

इससे पहले प्याज़ का निर्यात मूल्य कम से कम 750 डॉलर प्रति टन था.

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार स्थानीय तौर पर प्याज़ के दामों में कमी की संभावना है.

मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि प्याज़ की स्थानीय मांग और सप्लाई पर नज़र रखने

और ज़रूरत के अनुसार निर्यात मूल्य और बढ़ाने का भी फ़ैसला किया गया है.

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पाकिस्तान सरकार की ओर से प्याज़ का कम से कम निर्यात मूल्य बारह

सौ डॉलर प्रति टन रखकर उसकी स्थानीय क़ीमत कम करने का फ़ैसला किया गया है.

विदेशी व्यापार के विशेषज्ञ इक़बाल ताबिश ने बीबीसी को बताया कि मूल्य नियंत्रण का

यह तरीक़ा निर्यात रोकने के लिए अपनाया जाता है

ताकि देश से किसी चीज़ को बहुत अधिक विदेश जाने से रोका जा सके.

उन्होंने कहा कि अधिक निर्यात मूल्य से माल महंगा हो जाता है और विदेश से

इसकी ख़रीदारी के लिए आर्डर कम आते हैं और इस तरह देश के अंदर उस सामान की उपलब्धता बेहतर रहती है.

शाहजहां ने कहा कि एक्सपोर्ट प्राइस बढ़ने की बजाय सरकार को कोटा निर्धारित करना चाहिए कि

इससे अधिक प्याज़ एक्सपोर्ट नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि विदेशों में प्याज़ की मांग अधिक है

और पाकिस्तान में तीन चार बड़े एक्सपोर्टर्स का इस पर क़ब्ज़ा है जो अधिक क़ीमत पर उसे बेच सकते हैं

जिससे देश के अंदर प्याज़ का दाम कम नहीं हो पाएगा. हालांकि

अब्दुल वहीद अहमद उनकी इस बात से सहमत नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि निर्यात मूल्य बढ़ने से प्याज़ की क़ीमत में कमी आ सकती है

और एक दिन में इसकी प्रति मन क़ीमत में एक हज़ार रुपये तक की कमी आ चुकी है.

उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में

इसकी क़ीमत में और कमी आएगी. पाकिस्तान में आसमान पर प्याज की कीमतें

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