
सर्दियों मे भारत के कोने-कोने में खाए जाते हैं ये साग
शायद ही कोई पंजाबी हो, जिसे सरसों का साग पसंद ना हो। इस डिश को सरसों के साग और कुछ मसालों का
उपयोग करके बनाया जाता है। इसे बनाते समय पालक और बथुआ भी डाला जाता है। सरसों के साग का
क्रीमी टेक्सचर होता है और अमूमन लोग इसे मक्की के आटे से बनी रोटी के साथ खाना काफी पसंद करते
हैं। साथ ही, बहुत सारा सफेद मक्खन टेस्ट को कई गुना बेहतर बना देता है। ओडिशा में लोग गुंडी साग बड़े
चाव से खाते हैं। इस साग को गुंडी के पत्तों की मदद से बनाया जाता है। यह एक नई हरी किस्म है, जिसका
उपयोग इसके विशेष स्वाद और औषधीय गुणों के लिए किया जाता है। गुंडी के पत्तों को पारंपरिक ओडिशा
के मसालों के साथ पकाया जाता है। इसे सूखी लाल मिर्च, जीरा और लहसुन से बनाया जाता है। साथ ही,
इसमें ओडिशा के पांच मसालों का तड़का लगाया जाता है। यह सिंधियों की स्पेशलिटी है। साई भाजी दाल,
सब्जियों और पालक और अन्य साग का एक बैलेंस है। इसे बनाते समय मौसमी साग जैसे मेथी के पत्ते,
डिल और ताजा पालक आदि का इस्तेमाल किया जाता है। उबालने पर, चने की दाल प्रोटीन और क्रीमी
टेक्सचर देती है। टमाटर, गाजर और आलू जैसी सब्जियां इस डिश के पोषक तत्वों को बढ़ाती है। लाल
साग भाजा विशेष रूप में पश्चिम बंगाल में खाया जात है। इसे अमरनाथ के पत्ते यानी लाल साग की
मदद से तैयार किया जाता है। ताज़े लाल अमरनाथ के पत्तों को हरी मिर्च, पंचफोरन (पांच मसालों का मिश्रण)
और साग की हल्की कड़वाहट को दूर करने के लिए थोड़ी चीनी के साथ स्टर फ्राई किया जाता है।
सरसों के तेल के साथ अंतिम तड़का इस डिश के टेस्ट को बढ़ाता है।