कांग्रेस ने गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को लूटा : मोदी

कांग्रेस ने गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को लूटा : मोदी
कांग्रेस ने गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को लूटा : मोदी
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पनवेल में विशाल जनसभा संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र को
विकसित भारत के विजन का नेतृत्व करना है, बीजेपी और महायुति इसी संकल्प को लेकर काम
कर रहे हैं। अपने संबोधन की शुरूआत में मोदी ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे एक बार फिर
रायगढ़ की इस मिट्टी को फिर से नमन करने का अवसर मिला है।प्रधानमंत्री ने कहा कि इसलिए
मेरा गरीब,  जिंदगी की मुश्किलों से बाहर नहीं आ पाया। आजादी के 70 साल बाद भी देश के ज्यादातर लोग
रोटी, कपड़ा और मकान पाने के लिए जूझते रहे। पिछले 10 वर्षों में पहली बार ये हालात बदले हैं।
पहली बार कोई सरकार 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाई है। उन्होंने कहा कि महायुति
सरकार की नीतियां आज शोषितों और वंचितों की ताकत बन रही है। जो काम 10 साल में हुए, वो
काम पहले भी हो सकते थे। लेकिन कांग्रेस की सरकारों की मंशा ही नहीं थी कि गरीब आगे आकर
अपना हक मांगे। रायगढ़ से मेरा एक आत्मीय और भावात्मक संबंध है। उन्होंने कहा कि 2013 में
जब भाजपा ने मुझे पीएम पद का उम्मीदवार बनाया था, तब मैंने रायगढ़ किले में छत्रपति शिवाजी
महाराज की समाधि पर जाकर उनका आशीर्वाद लिया था। मोदी ने कहा कि 23 तारीख को जो नतीजे
आने वाले हैं, उसकी गारंटी यहां दिखाई दे रही है

कांग्रेस ने गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को लूटा : मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसलिए मेरा गरीब, जिंदगी की मुश्किलों से बाहर नहीं आ पाया।

आजादी के 70 साल बाद भी देश के ज्यादातर लोग रोटी, कपड़ा और मकान पाने के लिए

जूझते रहे। पिछले 10 वर्षों में पहली बार ये हालात बदले हैं। पहली बार कोई सरकार

25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाई है। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार की नीतियां

आज शोषितों और वंचितों की ताकत बन रही है। जो काम 10 साल में हुए, वो काम पहले

भी हो सकते थे। लेकिन कांग्रेस की सरकारों की मंशा ही नहीं थी कि गरीब आगे आकर

अपना हक मांगे। इसलिए आज भी कांग्रेस गरीबों के लिए कल्याण की हर योजना का

जमकर विरोध करती है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस कहती है कि जो 25 करोड़ लोग गरीबी

से बाहर निकले हैं, उन्हें मुफ्त राशन क्यों मिल रहा है। कांग्रेस चाहती है कि इन लोगों का

खर्च बढ़े और ये फिर से गरीबी में चले जाएं। अगर अघाड़ी वालों को मौका मिला तो ये

महाराष्ट्र में यही करेंगे।

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