
हाईकोर्ट में कैसे खारिज हुआ ममता सरकार का आरक्षण सिस्टम, हर बूथ का
मत प्रतिशत अपलोड करने का निर्देश देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, अरविंद
केजरीवाल की तरह हेमंत सोरेन को क्यों नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से जमानत?
कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची बीजेपी? इस सप्ताह
यानी 20 मई से 25 मई 2024 तक क्या कुछ हुआ? कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/
जजमेंट और टिप्पणियों का विकली राउंड अप आपके सामने लेकर आए हैं।
कुल मिलाकर कहें तो आपको इस सप्ताह होने वाले भारत के विभिन्न
न्यायालयों की मुख्य खबरों के बारे में बताएंगे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह पर अब 27 मई को सुनवाई
मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद
उच्च न्यायालय में हिंदू पक्ष की ओर से दलील दी गई कि भगवान सतत
नाबालिग हैं, इसलिए इस मामले में दीवानी प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) में
नाबालिग द्वारा या नाबालिग के खिलाफ वाद के संबंध में दिए गए प्रावधान
लागू होंगे। हिंदू पक्ष की ओर से आगे कहा गया कि मौजूदा वाद, भगवान
केशव देव की ओर से उनके मित्र द्वारा दायर किए गए हैं और इन वादों को
दायर करने में कोई अवैधता नहीं है। वाद की विचारणीयता के संबंध में पक्षों
की ओर से साक्ष्य के अवलोकन के बाद निर्णय किया जा सकता है। इस
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की अदालत में हो रही है।
अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करने का निर्देश दिया।
इससे पूर्व, हिंदू पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि पूजा स्थल कानून, 1991
गैर विवादित ढांचे के मामले में ही लागू होता है, ना कि विवादित ढांचे के मामले में।
वोटिंग के आंकड़ों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) की उस याचिका
निर्वाचन आयोग को निर्देश देने से मना कर दिया, जिसमें आयोग को
मतदान केंद्र-वार मतदान प्रतिशत के आंकड़े अपनी वेबसाइट पर
अपलोड करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। न्यायमूर्ति
दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की अवकाशकालीन पीठ
ने ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ नामक एनजीओ द्वारा दायर
याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी। पीठ ने कहा कि लोकसभा चुनाव
खत्म होने के बाद 2019 में दायर एनजीओ की रिट याचिका के साथ इसकी
सुनवाई की जाएगी। इसमें कहा गया है कि हर कोई स्वतंत्र और निष्पक्ष
चुनाव चाहता है लेकिन हमें इस बात की भी चिंता है कि कुछ शरारती लोग
फायदा उठाने की फिराक में हो सकते हैं। अदालत ने कहा कि अंतरिम
आवेदन पर दलीलें सुनी गईं। प्रथम दृष्टया हम अंतरिम आवेदन के अनुरोध
ए और रिट याचिका के अनुरोध ‘बी’ की समानता को देखते हुए इस स्तर
पर अंतरिम आवेदन पर कोई राहत देने के इच्छुक नहीं हैं।
कलकत्ता HC ने रद्द किए 5 लाख OBC सर्टिफिकेट
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में 2010 में कई वर्गों को दिया गया अन्य
पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का दर्जा बुधवार को रद्द कर दिया और राज्य में सेवाओं
व पदों पर रिक्तियों में इस तरह के आरक्षण को अवैध करार दिया। अदालत ने
कहा, “इन समुदायों को ओबीसी घोषित करने के लिए वास्तव में धर्म ही एकमात्र
मानदंड प्रतीत होता है।” इसने कहा, उसका मानना है कि मुसलमानों के 77
वर्गों को पिछड़ों के तौर पर चुना जाना पूरे मुस्लिम समुदाय का अपमान है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि यह अदालत इस संदेह को अनदेखा नहीं कर सकती
कि “उक्त समुदाय (मुसलमानों) को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए एक साधन
माना गया।” राज्य के आरक्षण अधिनियम 2012 के प्रावधानों को चुनौती
देने वाली याचिकाओं पर आदेश पारित करते हुए उच्च न्यायालय ने स्पष्ट
किया कि जिन वर्गों का ओबीसी दर्जा हटाया गया है, उसके सदस्य यदि
पहले से ही सेवा में हैं या आरक्षण का लाभ ले चुके हैं या राज्य की किसी
चयन प्रक्रिया में सफल हो चुके हैं, तो उनकी सेवाएं इस फैसले से
प्रभावित नहीं होंगी।
केजरीवाल की तरह सोरेन को SC से क्यों नहीं मिली जमानत
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के
उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया, जिसमें
एकल-न्यायाधीश के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया
गया था, जिसमें पार्टी को लोकसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार
संहिता का उल्लंघन करने वाले किसी भी विज्ञापन को प्रकाशित नहीं
करने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और
न्यायमूर्ति पंकज मिथल की अवकाश पीठ के समक्ष मामले को तत्काल
सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेख किया गया था। मामले का उल्लेख करने
वाले अधिवक्ता सौरभ मिश्रा ने पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय की एक
खंडपीठ ने 22 मई को आदेश पारित किया। आप अगली अवकाश पीठ का
रुख क्यों नहीं करते? वकील ने पीठ को बताया कि उच्च न्यायालय ने भाजपा
को लोकसभा चुनाव के दौरान चार जून तक विज्ञापन जारी करने से रोक दिया है।