
त्वरित सुनवाई के संवैधानिक अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया जोर
पीठ ने जोरदार टिप्पणी करते हुए कहा कि आप एनआईए हैं। कृपया न्याय का मजाक न बनाएं।’
चार साल हो गये, और मुकदमा शुरू नहीं हुआ। ऐसा नहीं किया गया। आरोपी ने जो भी अपराध
किया है, उसे त्वरित सुनवाई का अधिकार है। आदेश में कहा गया कि चाहे कितना भी गंभीर अपराध
क्यों न हो, आरोपी को त्वरित सुनवाई का अधिकार है, जैसा कि भारत के संविधान के तहत निहित
है। हम आश्वस्त हैं कि जिस तरह से अदालत और अभियोजन एजेंसी इस मामले में आगे बढ़ी है,
उससे त्वरित सुनवाई का अधिकार कुंठित हो गया है, जिससे अनुच्छेद 21 का उल्लंघन हुआ है।
अदालत फरवरी 2024 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी,
जिसमें जावेद गुलाम नबी शेख को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उन्हें 2020 में
मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जिससे कथित तौर पर पाकिस्तान से आए नकली नोटों
की बरामदगी हुई थी। एनआईए ने बाद में जांच का नियंत्रण अपने हाथ में लेते हुए दावा किया कि
शेख ने फरवरी 2020 में दुबई का दौरा किया था और वहां नकली मुद्रा प्राप्त की थी।