
मालेगाँव विस्फोट मामले में भी ऐसा ही प्रयास किया गया। इसका एक कारण कांग्रेस की वह मानसिकता है
जिसके तहत कांग्रेस को नेतृत्व देने वाले राजनेता केवल यही सोचते हैं
कि हम तो सरकार चलाने के लिए ही बने हैं।
आज भी कांग्रेस के नेता इसी भावना के साथ विचार रखते हैं।
भारत में स्वार्थी राजनीति का खेल यूँ तो बहुत पुराना है
लेकिन ऐसी राजनीति जनमानस को केवल भ्रमित करने का काम ही करती है।
यह भी सत्य है कि इसका प्रभाव लम्बे समय तक नहीं रहता।
राजनीति सच की होना चाहिए, न कि झूंठ की।
लेकिन आज विसंगति यह है कि राजनीतिक दल केवल अपने लिए ही
राजनीति करते हैं, देश के लिए नहीं।
आज राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करने तक सीमित हो गया है।
ऐसी ही राजनीति के माध्यम से हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी स्थापित करने का खेल खेला गया।
अब इस षड्यंत्र की परतें भी उधड़ने लगी हैं।
ध्वस्त हुआ एक और झूठा नैरेटिव
जिसके फलस्वरूप फेक नैरेटिव का पर्दाफास हो गया।
भारत क्या है और उसकी विरासत क्या है? इसके मूल में जो प्रमाण मिलते वे उसका एक दर्शन है।
यह दर्शन मात्र कुछ वर्षों का कार्य नहीं, बल्कि एक लम्बी साधना के बाद निकला है।
जो भारतीय समाज के लिए एक प्रेरणीय पाथेय है।
लेकिन लम्बे समय से इस आदर्श विरासत को मिटाने का कुचक्र भी चल रहा है।
हम यह भली भांति जानते हैं कि जब जब भारतीय समाज विघटित हुआ है
तब भारत को कमजोर करने के सुनियोजित प्रयास भी किए।
देश विघातक शक्तियों ने भारत के समाज में फूट डालकर अपने मंसूबों को सफल किया।
ऐसे प्रयास आज भी हो रहे हैं।
मूल समस्या पर किसी प्रकार का कोई चिंतन नहीं हो रहा है
और न ही उस दिशा में कोई प्रयास ही हो रहा है।