
दुनिया में नर्सों की सेवा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, हर दिन, नर्सें शांत शक्ति, स्थिर हाथों
और करुणा से भरे दिलों के साथ अस्पतालों, क्लीनिकों और विभिन्न सामुदायिक
स्थानों पर कदम रखते हुए रोगियों के लिये देवदूत बनती हैं। नर्से भगवान का रूप होती है,
वे ही इंसान के जन्म की पहली साक्षी बनती है और उनमें करुणा का बीज बोती है।
एक रोगी को स्वस्थ करने में वे अपना सब कुछ दे देती हैं। रोगी की सेवा करते हुए
वे अपना पारिवारिक सुख, करियर, जीवन और वर्तमान सबकुछ झांेक देती है।
नोबल नर्सिंग सेवा की शुरुआत करने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म दिवस
पर हर साल दुनिया भर में 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के रूप में मनाया
जाता है। यह दिवस 1965 से इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेज द्वारा शुरु हुआ है
बहुत से लोग इस दिन का उपयोग अपने देश एवं दुनिया में नर्सों द्वारा किए गए
अद्भुत सेवा कार्यों का सम्मान करने के लिए करते हैं। इस दिवस की 2025 की थीम है
नर्सें रोगी के लिये करुणा एवं मुस्कान बांटती है
‘हमारी नर्सें हमारा भविष्य-नर्सों की देखभाल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है।
यह थीम नर्सों की भलाई पर ध्यान केंद्रित करते हुए न केवल उनकी व्यक्तिगत
भलाई के लिए बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के अधिक लाभप्रद एवं सशक्त
बनाने पर बल देती है। नर्सों को दूसरों की देखभाल करने के लिए जाना जाता है
स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को भी उनकी देखभाल करनी चाहिए। उचित समर्थन के बिना
सबसे कुशल पेशेवर भी उपेक्षा, आर्थिक शोषण, तनाव और थकान का सामना कर सकते हैं।
किसी बीमारी से उबरने में जितना बड़ा योगदान चिकित्सकों, दवाओं और इलाज का
होता है, उतना ही सही देखभाल का भी होता है। इसमें डॉक्टर्स से कहीं बड़ी जिम्मेदारी
नर्सेज निभाती हैं, जो 24 घंटे मरीज की देखरेख में लगी रहती हैं। वास्तव में उनकी
निःस्वार्थता एवं सेवाभावना उन्हें रोगियों के लिए स्वर्गदूत बनाती है
एक फरिश्ते के रूप में वे जीवन का आश्वासन बनती है