पिता ने पढ़ने नहीं दिया और पति ने ज़हर पीने पर मजबूर किया
आज के
ब्रेव बाइटस के एपिसोड में हमारे साथ जुड़ीं बिज़नेस कोच आयशा तबस्सुम जिनसे हमने बात की
और जानी उनकी संघर्ष की कहानी और समझा कि कैसे इन मुसीबतों ने उन्हें आगे की राह चुनने की
मोटिवेशन दी।हम सभी के जीवन में संघर्ष का दौर आता है और यह समय ना सिर्फ हमारी परीक्षा लेता
है बल्कि हमें बहुत ज्यादा पराक्रमी और मजबूत भी बना देता है। आज के ब्रेव बाइटस के एपिसोड में हमारे
साथ जुड़ीं बिज़नेस कोच आयशा तबस्सुम जिनसे हमने बात की और जानी उनकी संघर्ष की कहानी और
समझा कि कैसे इन मुसीबतों ने उन्हें आगे की राह चुनने की मोटिवेशन दी।हम एक स्लम एरिया में रहते
थे और आर्थिक हालत सही नहीं होने के कारण मेरे पिता नहीं चाहते थे कि मैं पढूं, पर मेरी माँ ने मुझे
पढ़ाने के लिए हर ज़रूरी कोशिश की। मैंने दसवीं में आचे मार्क्स ला क्र डिप्लोमा के लिए फ्री सीट हासिल
की और फिर पिता को मनाया कि मुझे पढ़ने दें। मैंने घर के हालात देखते हुए पढ़ाई के साथ जॉब करने
के लिए कॉलेज से परमिशन ले ली। मैंने डिप्लोमा के समय 2 जॉब्स की, एक सेल्स की जहाँ मैं सुबह
घर घर जाक्र अखबार की सब्सक्रिप्शन बेचा करती थी और दूसरी कॉलिंग की।
पिता ने पढ़ने नहीं दिया और पति ने ज़हर पीने पर मजबूर किया
पहले मेरे पापा मेरे लिए एक ऐसा रिश्ता लाये जो लड़का चौथी फेल था जब मैंने और मेरी माँ ने उन्हें
समझाया कि कम से कम पढ़ा लिखा हो तब मैं शादी करुगी तब उन्होंने अगले ही दिन एक और
लड़का मेरे लिए ढूंढ लिए और कहा कि वो ग्रेजुएट है, कमाता है और अपना घर भी है। मैंने
सोचा मेरे घरवालों ने तो कभी मुझे नहीं समझा शायद पढ़ा-लिखा लड़का है तो मुझे समझेगा
आगे जॉब करने और पढने देगा इसलिए मैंने शादी के लिए हां करदी। शादी की ही रात को
मेरे पति ने मुझसे कहा कि मैंने देखा कि शादी पर तुम्हारी माँ ने मेरी माँ से दहेज़ के लिए
किस तरह माना किया और बत्तमीजी से बात की इसलिए मैं देखना चाहता हूँ कि तुम
मेरी माँ और बहन के साथ कैसा बर्ताव रखती हो उसके बाद ही मैं तुमने पत्नी के तौर
पर अपनाऊंगा। उसके बाद वो मुझसे ज्यादा बात नहीं करता था। हफ्तों तक घर से
बाहर रहता था, मेरे फ़ोन मेसेज करने पर भी जवाब नहीं देता था।