
वैश्विक स्तर पर विश्व के कई देशों में आर्थिक गतिविधियों पर संकट
के बादल मंडराते हुए दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका में तो श्री डॉनल्ड ट्रम्प
के राष्ट्रपति बनने के बाद से नित नई घोषणाएं की जा रही है। कभी
टैरिफ को बढ़ाया जा रहा है तो कभी टैरिफ को लागू करने की तारीखों
में परिवर्तन किया जा रहा है तो कभी टैरिफ को कम किया जा रहा है।
कुल मिलाकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अफरा तफरी का माहौल बन
गया है। अभी हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति श्री ट्रम्प एवं अमेरिका के
एक महत्वपूर्ण एवं शक्तिशाली मंत्री श्री एलान मस्क के बीच युद्ध छिड़
गया है एवं अब वे एक दूसरे पर गम्भीर आरोप लगाते हुए दिखाई दे रहे
हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था का इन सब बातों से बहुत नुक्सान होता हुआ
दिखाई दे रहा है। बेरोजगारी भत्ता लेने वाले नागरिकों की संख्या में वृद्धि
हो रही है, अमेरिकी कम्पनियों द्वारा कर्मचारियों की छंटनी पर विचार
किया जा रहा है एवं आर्थिक विकास दर कम हो रही है। दूसरी ओर, रूस
यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म होने के आसार अभी भी दिखाई नहीं दे रहे हैं।
एक तरह से इजराईल, हम्मास के बीच युद्ध अभी भी जारी ही है। चीन
एवं अमेरिका के बीच में आई खटास भी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को भारतीय रिजर्व बैंक के दो महत्वपूर्ण तोहफे
वैश्विक स्तर पर इन समस्त घटनाओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था
नित नई ऊचाईयों को छूने की ओर अग्रसर है। भारत में नागरिक शांतिपूर्ण
तरीके से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रति कटिबद्ध हैं। केंद्र एवं
राज्य सरकारों के उपक्रम एवं निजी क्षेत्र की कम्पनियां देश के आर्थिक
विकास को गति देने में अपने प्रयास लगातार तेज करते हुए दिखाई दे
रहे हैं। इसी क्रम में, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिनांक 6 जून 2025 को
द्विमासिक मुद्रा नीति की घोषणा करते हुए, देश की अर्थव्यवस्था को
गति देने के उद्देश्य से, दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। एक, रेपो दर
में 50 आधार बिंदुओं की कमी करते हुए इसे 6 प्रतिशत की दर से नीचे
लाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया गया है। केलेंडर वर्ष 2025 में रेपो दर में
यह लगातार तीसरी कटौती की गई है एवं कुल मिलाकर रेपो दर में 100
आधार बिंदुओं की कमी की जा चुकी है। फरवरी 2025 एवं अप्रेल 2025
घोषित की गई मुद्रा नीति के माध्यम से रेपो दर में दोनों बार 25 आधार
बिंदुओं की कमी की गई थी। रेपो दर उस दर को कहते हैं, जिस दर पर
भारतीय रिजर्व बैंक विभिन्न बैंकों को आवश्यकता पड़ने पर ऋण
उपलब्ध कराता है एवं विभिन्न बैंक रेपो दर को आधार दर बनाते
हुए इस दर पर कुछ आधार बिंदु (जमाराशि की लागत एवं लाभ की
राशि का समायोजन करते हुए) जोड़ते हुए, ब्याज की दर पर, अपने
ग्राहकों को ऋणराशि उपलब्ध कराते हैं।