शियाई खेलों में नाकामी के बाद अमेरिकी मनोवैज्ञानिक और मानसिक अनुकूलन
कोच को लाना भारतीय महिला हॉकी टीम के लिये रहा मास्टर स्ट्रोक
उन्होंने कहा ,‘‘ एशियाई खेलों के बाद पीटर ने खिलाड़ियों में सकारात्मकता भरने पर काफी काम किया।
हमें जब भी उनकी जरूरत होती , वह आनलाइन बातचीत के लिये उपलब्ध थे। वह काफी शांत रहते हैं।
वह हमेशा कहते हैं कि जीवन रूकता नहीं है, चलता रहता है औ
र हमने उनसे यही सीखा है।’’
पेशेवर आइस हॉकी खिलाड़ी रहे हारबर्ल ने 1996 से 2006 के बीच
अमेरिकी महिला आइस हॉकी टीम को बतौर खेल मनोविज्ञान सलाहकार
अपनी सेवायें दी। वह 2001 से 2005 के बीच अमेरिकी ओलंपिक
समिति के साथ भी काम करते रहे और 2005 से 2023 तक अमेरिकी
ओलंपिक और पैरालम्पिक समिति के सीनियर खेल मनोवैज्ञानिक रहे।
कोच को लाना भारतीय महिला हॉकी टीम के लिये रहा मास्टर स्ट्रोक
भारत की कोच शॉपमैन ने कहा ,‘‘ एफआईएच क्वालीफायर में अमेरिका
से पहला मैच हारने के बाद खिलाड़ियों की बैठक हुई। उसके बाद मैने
पीटर से बात की और उसने मुझे रणनीति बताई। उसे इस बदलाव का
श्रेय जाता है।मानसिक स्वास्थ्य काफी महत्वपूर्ण है और चुनौतियों ,
संघर्षों से उबरना आसान नहीं होता। खेल में मैदान के भीतर और
बाहर आप जो कुछ भी सीखते हैं, वह पूरी जिंदगी आपके साथ रहता है।