
मोगैंबो को पहले ही हो गयी थी अपनी मौत का आशंका
बॉलीवुड में अमरीश पुरी के फ़िल्मी करियर शुरुआत साल 1971 की ‘प्रेम पुजारी’ से हुई। हिंदी
सिनेमा में पुरी को स्थापित होने में थोड़ा वक्त जरूर लगा, लेकिन फिर कामयाबी उनके कदम
चूमती गयी और उन्होंने मुड़कर कभी वापस देखा। 1980 के दशक में उन्होंने बतौर खलनायक
कई बड़ी फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। 1987 में शेखर कपूर की फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में मोगैंबो
की भूमिका के जरिए वे सभी के जेहन में छा गए। उन्होंने ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ‘घायल’
और ‘विरासत’ में 1990 के दशक में अपनी सकारात्मक भूमिका के जरिए सभी का दिल जीता।
अमरीश पुरी को इस घटना के बाद अपनी मौत का आभास हो गया था। राजीव के मुताबिक
धीरे-धीरे पिता को खून की कमी बनने लगी थी। राजीव ने कहा कि, ‘पापा बुरी तरह घबरा गए
थे। लेकिन वह दृढ़ इच्छा शक्ति वाले थे। वह दुनिया को दिखाना चाहते थे कि कितने स्ट्रॉन्ग
हैं। पापा अच्छी तरह जानते थे कि 72 साल की उम्र के पड़ाव पर अब उनके शरीर में सबकुछ
ठीक नहीं हो सकता। पापा का कहना था कि जो होना होगा, वो होगा।’उन्होंने हिंदी के अलावा
कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तेलुगू और तमिल फिल्मों तथा हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया।
उन्होंने अपने पूरे करियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। अमरीश पुरी के अभिनय
से सजी कुछ मशहूर फिल्मों में ‘निशांत’, ‘गांधी’, ‘कुली’, ‘नगीना’, ‘राम लखन’, ‘त्रिदेव’, ‘फूल
और कांटे’, ‘विश्वात्मा’, ‘दामिनी’, ‘करण अर्जुन’, ‘कोयला’ आदि शामिल हैं। दर्शक उनकी
खलनायक वाली भूमिकाओं को देखने के लिए बेहद उत्साहित होते थे।