वित्त मंत्री ने विपक्ष पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप

वित्त मंत्री ने विपक्ष पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप
वित्त मंत्री ने विपक्ष पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में बजट पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि बजट में
विकास, रोजगार, पूंजी निवेश और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया
गया है। उन्होंने कहा कि पीएलआई योजना में निवेशकों की गहरी दिलचस्पी बरकरार है। उन्होंने
दावा किया कि हमने भारत को विनिर्माण के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने का प्रयास किया है। इसके
साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की नीति युवाओं को सक्षम बनाने की है तथा बजट में पांच
योजनाओं के पैकेज की घोषणा की गई है। उन्होंने विपक्ष पर दुष्प्रचार करने का भी आरोप लगाया।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि मैंने इस सदन को 2021-22 में वचन दिया था कि 2025-26 तक
राजकोषीय घाटे को 4.5% के नीचे लाने के लिए काम करेंगे, जो 2021 में 9.2% तक पहुंच गया था।
हम अपने लक्ष्य को पूरा करने के रास्ते पर हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और इससे जुड़े सेक्टर्स के लिए
बजट में 1.52 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान है जो इससे पिछले वर्ष से 8000 करोड़ ज्यादा है।
तुलना के लिए बता दूं कि 2013-14 में, UPA के अंतिम वर्ष में कृषि के लिए सिर्फ 30000 करोड़
रु का आवंटन हुआ था। तारमण ने कहा कि 35A और 370 संविधान का हिस्सा नहीं थे। इसे बस
संविधान के साथ जोड़ा गया था यह कहते हुए कि, “ये भी संविधान का हिस्सा है।

वित्त मंत्री ने विपक्ष पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप

वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे पाम तेल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल शुल्क

2.5% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। यह उपाय भारत में कच्चे तेल को रिफाइनिंग, रोजगार

सृजन और देश में खाद्य तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आयात करने की अनुमति देता

है। उन्होंने बताया कि वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 279 में परिभाषित शुद्ध आय के प्रतिशत

के रूप में करों के अवमूल्यन की सिफारिश करता है। शुद्ध आय की गणना सकल कर प्राप्तियों से

उपकर, अधिभार और संग्रह की लागत में कटौती के बाद की जाती है। बजट 2024-25 पर चर्चा का

जवाब देते हुए राज्यसभा में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सकल कर प्राप्तियों के आधार पर हस्तांतरण

की गणना करना और फिर दावा करना कि केंद्र वित्त आयोग द्वारा सुझाए गए से कम हस्तांतरण कर

रहा है, गलत है। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग शुद्ध आय के प्रतिशत के रूप में करों के हस्तांतरण की

सिफारिश करता है, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 279 में परिभाषित किया गया है। शुद्ध आय की

गणना सकल कर प्राप्तियों से उपकर, अधिभार और संग्रह की लागत घटाकर की जाती है। 

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