संसद के पहले ही सत्र में Modi को इतने सख्त तेवर क्यों दिखाए

संसद के पहले ही सत्र में Modi को इतने सख्त तेवर क्यों दिखाए
संसद के पहले ही सत्र में Modi को इतने सख्त तेवर क्यों दिखाए
 
प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह विपक्ष के
नेता और संसद सत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि
निचले सदन में 10 साल के अंतराल के बाद किसी नेता को आधिकारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष का
दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर
राहुल गांधी को अब कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाएगा। इससे प्रोटोकॉल
सूची में उनका स्थान भी बढ़ जाएगा। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार
दुबे ने मजाकिया अंदाज में कहा कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी
ने कुर्ता तो पहन लेकिन वह तुरंत टी-शर्ट में भी आ गए।नीरज दुबे ने कहा कि इस बार
जनता ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए संदेश दिया कि वह काम को तेजी से करके दिखाएं
जबकि राहुल गांधी के लिए है कि वह खुद को साबित करके दिखाएं। राहुल गांधी नेता
प्रतिपक्ष बने हैं। 10 साल के बाद देश को नेता प्रतिपक्ष बना है। ऐसे में राहुल गांधी को साबित
करके दिखाना होगा। हमारा लोकतंत्र मजबूत हुआ है। सत्ता पक्ष मनमानी नहीं कर सकेगा।
इस बार पूरी तरीके से भाजपा अपने दम पर सरकार में नहीं है। ऐसे में उसे सहयोगियों और
विपक्ष को भी साथ लेकर चलने की जरूरत होगी। नीरज दुबे ने कहा कि पहले सप्ताह में संसद
में जो कुछ भी हुआ, उससे साफ तौर पर कहा जा सकता है कि भले ही लोकसभा नई है लेकिन
सियासत वही पुरानी है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर तमाम मुद्दों का जिक्र हुआ। लेकिन विपक्ष
नीट को लेकर लगातार चर्चा की मांग कर रहा है। राष्ट्रपति ने तमाम चुनौतियों पर बातचीत की
है। ऐसे में विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी को सब्र दिखाने की जरूरत है और अपने तेवर
में थोड़ी नरमी लाने की भी जरूरत होगी। 

संसद के पहले ही सत्र में Modi को इतने सख्त तेवर क्यों दिखाए

इस सप्ताह हमने संविधान बनाम इमरजेंसी का खूब शोर सुना। इसी को लेकर हमने

नीरज दुबे से सवाल पूछा नीरज दुबे ने कहा कि कहीं ना कहीं इस तरीके से संविधान

को लेकर विपक्ष भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से भाजपा

की ओर से इमरजेंसी को उठाया गया। सरकार यह बताने की कोशिश कर रही

है कि संविधान पर हमने नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी ने हमला किया

। जब इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लगाया था

, इस दौरान लोगों के अधिकार छीन दिए गए थे। नेताओं और

पत्रकारों को जेलों में डाल दिया गया था। देश में संविधान पूरी तरीके से खत्म

हो चुका था। एक व्यक्ति की मर्जी से शासन चल रहा था। यही बीजेपी आज की युवाओं

को संदेश देने की कोशिश कर रही है कि देश में कौन लोकतंत्र का समर्थन है

और किसने लोकतंत्र पर हमला किया था।

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