सीतारमण ने अमेरिकी शुल्क से निपटने के लिए सरकार के पूर्ण समर्थन का दिया आश्वासन:फियो

Sitharaman
बयान के अनुसार, मंत्री ने श्रमिकों की आजीविका की सुरक्षा के महत्व का भी उल्लेख किया
और उद्योग जगत से वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कर्मचारियों
को नौकरी की निरंतरता का आश्वासन देने का आह्वान किया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्यातकों के एक प्रतिनिधिमंडल को बृहस्पतिवार
को आश्वासन दिया कि अमेरिकी शुल्क के कारण
उत्पन्न इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है
और उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।
फियो ने एक बयान में यह जानकारी दी।

भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन के नेतृत्व

में एक प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वासन दिया गया।

मंत्री ने साथ ही कहा कि सरकार उच्च अमेरिकी शुल्क के कारण

उत्पन्न समस्याओं से निपटने में हर संभव प्रयास कर रही है।

प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी शुल्क में वृद्धि से भारतीय निर्यातकों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों

से उन्हें अवगत कराया। रल्हन ने बातचीत के दौरान निर्यातक समुदाय

की तात्कालिक चिंताओं, विशेष रूप से बाजार पहुंच, प्रतिस्पर्धी क्षमता

और रोजगार सृजन पर उच्च शुल्क के प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख किया।

सीतारमण ने अमेरिकी शुल्क से निपटने के लिए सरकार के पूर्ण समर्थन का दिया आश्वासन:फियो

उन्होंने देश की वृद्धि और रोजगार सृजन के प्रमुख चालक रहे निर्यातकों पर दबाव

कम करने के लिए त्वरित एवं सुनियोजित नीतिगत उपायों की आवश्यकता बतायी।

फियो ने कहा, ‘‘ वित्त मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार

इस समय भारतीय निर्यातकों के साथ मजबूती से खड़ी है।

साथ ही सरकार निर्यातक समुदाय की सभी चिंताओं को दूर करने के लिए

प्रतिबद्ध है और उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगी।’’

बयान के अनुसार, मंत्री ने श्रमिकों की आजीविका की सुरक्षा के महत्व का भी उल्लेख किया

और उद्योग जगत से वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कर्मचारियों

को नौकरी की निरंतरता का आश्वासन देने का आह्वान किया।

इसमें कहा गया, ‘‘ उन्होंने कहा कि सरकार वृद्धि की गति

और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत की स्थिरता बनाए रखने के लिए

निर्यातकों को व्यापक समर्थन प्रदान करेगी।’’ भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका का 50 प्रतिशत

शुल्क बुधवार से प्रभावी हो गया। इससे झींगा, परिधान, हीरे, चमड़ा एवं जूते चप्पल

तथा रत्न व आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।

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