
भारतीय परिधान निर्यातकों को वित्त वर्ष
गत वित्त वर्ष में उच्च खुदरा ‘इन्वेंट्री’, प्रमुख बाजारों से सुस्त मांग, लाल सागर संकट
सहित आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दों और पड़ोसी देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण निर्यात
प्रभावित हुआ था। इक्रा ने कहा कि मांग में सुधार के साथ उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष
2024-25 और वित्त वर्ष 2025-26 में पूंजीगत व्यय में वृद्धि होगी। यह कारोबार के
पांच से आठ प्रतिशत के दायरे में रह सकता है। इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह
प्रमुख (कॉर्पोरेट रेटिंग्स) श्रीकुमार कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘ वित्त वर्ष 2023-24 में मामूली
(दो प्रतिशत की) गिरावट के बाद, भारतीय परिधान निर्यातकों को वित्त वर्ष 2024-25
में नौ से 11 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज करने का अनुमान है। यह विभिन्न ग्राहकों
द्वारा अपनाई गई जोखिम-मुक्त करने की रणनीति तथा प्रमुख अंतिम बाजारों खासकर
अमेरिका तथा यूरोपीय संघ क्षेत्रों में खुदरा ‘इन्वेंट्री’ की पुनःपूर्ति से लाभान्वित होगी।
’’ उन्होंने कहा कि फिर भी कमजोर व्यापक आर्थिक माहौल तथा भू-राजनीतिक मुद्दों
के बीच कुछ प्रमुख बाजारों में मांग की अनिश्चितता से जुड़ी चुनौतियां कायम हैं। इक्रा
ने कहा कि बांग्लादेश में हालिया भू-राजनीतिक तनाव के परिणामस्वरूप भारत सहित
देश के बाहर क्षमता में वृद्धि हो सकती है।