Rakshabandhan 2025: रक्षाबंधन और सनातन संस्कृति

Rakshabandhan 2025: रक्षाबंधन और सनातन संस्कृति
Rakshabandhan 2025: रक्षाबंधन और सनातन संस्कृति
रक्षाबंधन भारत का एक पारंपरिक पर्व है, लेकिन इसका प्रभाव और महत्व
अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गया है।
प्रवासी भारतीयों की बढती संख्या के कारण यह पर्व अब सांस्कृतिक कूटनीति
वैश्विक भाईचारे और मानवीय संबंधों के प्रतीक के रूप में उभर रहा है
और अब एक सांस्कृतिक आदान-प्रदान का माध्यम बन रहा है।
सनातन संस्कृति में ‘रक्षा’ और ‘बंधन’ दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणाएं हैं।
‘रक्षा’ का अर्थ केवल शारीरिक सुरक्षा नहीं, बल्कि भावनात्मक, सांस्कृतिक
और आध्यात्मिक रक्षा भी है। वहीं ‘बंधन’ किसी को बाधित करने वाला नहीं
बल्कि प्रेम, विश्वास और मर्यादा से जुड़ा आत्मिक संबंध है।
रक्षाबंधन का मूल बहुत प्राचीन है ।
इसका सबसे प्रारंभिक उल्लेख वेदों में “रक्षासूत्र” के रूप में मिलता है।
यजुर्वेद में ब्राह्मण पुरोहितों द्वारा यज्ञ या धार्मिक अनुष्ठानों के समय राजा या यजमान
की कलाई में रक्षासूत्र बाँधने की परंपरा थी
जिससे उसकी रक्षा दैविक  शक्तियों के द्वारा हो सके। मंत्र था:

यह रक्षासूत्र केवल बहन-भाई के रिश्ते का प्रतीक नहीं था

बल्कि धर्म, शक्ति और रक्षा का सूचक था। रक्षासूत्रों का उपयोग सामाजिक, धार्मिक

और राजनैतिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु हुआ।

Rakshabandhan 2025: रक्षाबंधन और सनातन संस्कृति

उदाहरण के लिए, भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा

तब की जब उसने उन्हें रक्षासूत्र बाँधा था। भागवत पुराण में आता है

कि जब देवासुर संग्राम में इंद्र परेशान थे, तब उनकी पत्नी इंद्राणी

ने उनके हाथ में रक्षासूत्र बाँधा। उसी दिन श्रावण पूर्णिमा थी

और तभी से इस दिन को “रक्षा बंधन” का पर्व माना गया।

राजनीतिक संदर्भ में रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूं को रक्षासूत्र भेजकर

अपने राज्य की रक्षा का अनुरोध किया था।

यह एक ऐसा पर्व है जो कर्तव्यबोध, नारी सम्मान, सामाजिक समरसता

और पारिवारिक एकता को प्रेरित करता है और धर्म, समाज

और आत्मीयता के बीच पुल का कार्य करता है।

आज जब समाज में आत्मीय रिश्ते कमजोर पड़ते जा रहे हैं

तब रक्षाबंधन हमें स्मरण कराता है कि रक्षा का  अर्थ केवल सुरक्षा नहीं

बल्कि सम्मान, विश्वास और स्नेह  का संवाहन है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »